कृष्ण स्वधाम गमन की कथा सुन भावुक हुए श्रोता – पंडित विजय शंकर मेहता बोले, कामनाओं का त्याग कर कर्म करना ही सन्यास है


कोरबा। मृत्यु से कोई नहीं बच पाया, जो आया है, वह एक दिन जाएगा ही। मृत्यु से न ईश्वर बच सके और न मानव की कोई विसात है। महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद हस्तिनापुर उजड़ गया था, चारों ओर सन्नाटा छा गया था। कौरव वंश के विनाश और गांधारी के श्राप की पीड़ा का स्मरण कर भगवान कृष्ण का स्वधाम गमन का प्रसंग जब कथा वाचक पंडित विजय शंकर मेहता ने सुनाया, तो जश्न रिसोर्ट कोरबा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें और अंतिम दिन उपस्थित श्रोता भावुक हो उठे।

पंडित मेहता ने बताया कि कृष्ण ने अपने अंतिम समय में उद्धव को गीता का संदेश देकर कहा था – सन्यास के लिए भगवा वस्त्र पहनना जरूरी नहीं, बल्कि जो कामनाओं का त्याग कर कर्म करता है, वही सच्चा सन्यासी है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन में संकट और परेशानियां आती रहेंगी और उनका समाधान स्वयं के भीतर ही छुपा होता है। सुख का समय कब निकल जाता है, पता नहीं चलता, लेकिन संकट का हर पल युग जैसा प्रतीत होता है।

कथा वाचक ने परीक्षित प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि कलयुग में भ्रष्टाचारी सत्ता के शिखर तक पहुंचेंगे और ईमानदार व्यक्ति को कठिन जीवन जीना पड़ेगा। न्यायालय से भी न्याय केवल वही पा सकेगा, जिसके पास धन होगा। उन्होंने श्रोताओं से कहा कि दूसरों पर दोषारोपण करने के बजाय अपने दोष को पहचानना और उसे दूर करने का प्रयास ही जीवन का सार है।

जाति व्यवस्था पर प्रहार
पंडित मेहता ने कहा कि सनातन धर्म में समाज को चार वर्गों – ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र – में विभाजित किया गया था। यह केवल जिम्मेदारियों और कर्तव्यों की व्यवस्था थी, लेकिन कालांतर में इसे जातिगत भेदभाव का रूप दे दिया गया। उन्होंने कहा कि इस भेदभाव को समाप्त करना आवश्यक है।

जीवन प्रबंधन के संदेश
कथा वाचक ने श्रोताओं को जीवन प्रबंधन का संदेश देते हुए कहा कि घर-परिवार में संवाद बनाए रखें, ससुराल की कभी निंदा न करें, क्योंकि वहां से आई बेटी को घर की लक्ष्मी समझना चाहिए। परिवार बचाने के लिए झुकना और हारना सीखें, यही असली जीत है। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरों पर दोष ढूंढ़ना मानव का सबसे बड़ा दोष है।
कृष्ण गीता में मिलेंगे
पंडित मेहता ने कृष्ण-उद्धव संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि कृष्ण ने कहा था – “मेरे जाने के बाद लोग मुझे खोजेंगे, तो उनसे कहना मैं गीता में मिलूंगा।” नियति और कर्म के नियम ही जीवन और मृत्यु को तय करते हैं।
आयुक्त पाण्डेय सहित गणमान्यजन हुए भाव-विभोर
आज कथा के अंतिम दिन निगम आयुक्त आईएएस आशुतोष पाण्डेय कथा श्रवण के लिए पहुंचे और व्यासपीठ से आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर पूर्व महापौर राजकिशोर प्रसाद सहित कोरबा के कई गणमान्य नागरिकों ने पंडित विजय शंकर मेहता के प्रवचन का श्रवण कर स्वयं को धन्य महसूस किया।

