मानिकपुर डिपरापारा में बुलडोजर कार्रवाई : करोड़ों की सरकारी जमीन लूट का खेल, पूर्व मंत्री का खास और सांसद प्रतिनिधि सीताराम चौहान पर आरोप


कोरबा। मानिकपुर डिपरापारा इलाके में गुरुवार को प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सरकारी जमीन पर बने 10 मकानों को ध्वस्त कर दिया और 9 मकानों को दो दिन का नोटिस जारी किया। लेकिन इस कार्रवाई ने करोड़ों की जमीन घोटाले का काला सच सामने ला दिया। आरोप है कि पूर्व मंत्री का खास और वर्तमान में सांसद प्रतिनिधि सीताराम चौहान समेत लक्ष्मण लहरे, राजू सिमोन और सूरज चौहान ने करीब 1 एकड़ शासकीय भूमि पर कब्जा कर उसे टुकड़ों में बेच दिया और करोड़ों रुपये का खेल किया।

करोड़ों का अवैध धंधा और नेताओं का संरक्षण

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह खेल बिना राजनीतिक संरक्षण और प्रभावशाली नेटवर्क के संभव ही नहीं था। सीताराम चौहान का सांसद प्रतिनिधि होना इस पूरे मामले को और गंभीर बनाता है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि इतने बड़े पैमाने पर जमीन की हेराफेरी नेताओं और प्रशासनिक मिलीभगत के बिना कैसे हो सकती थी।
पीड़ित परिवारों का आक्रोश

बुलडोजर चलने से कई परिवार उजड़ गए। पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने यह जमीन बाकायदा रजिस्ट्री कराकर खरीदी थी।
एक बुजुर्ग ने कहा—
“हमें बताया गया कि सब कागज दुरुस्त हैं। हमने जीवनभर की कमाई लगा दी। अब प्रशासन घर तोड़ गया और जिनसे हमने जमीन खरीदी वे फरार हैं। हमारा कसूर क्या है?”
लोगों का दर्द था कि अब वे न घर के रहे, न घाट के। मकान उजड़ने से बच्चों और महिलाओं तक को खुले आसमान तले रात गुजारनी पड़ी।
महिला पार्षद के साथ बदसलूकी का मामला
कुछ महीने पहले जब एक महिला पार्षद ने मौके पर जाकर अतिक्रमण का विरोध किया था, तो आरोपियों ने उन्हें गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया। पार्षद ने इस घटना की लिखित शिकायत कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार से की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अब जब मकान गिराए गए हैं तो यह मामला और तूल पकड़ रहा है।
प्रशासन की कार्रवाई और सवालों का घेरे
सुबह 10 बजे शुरू हुई कार्रवाई में भारी पुलिस बल मौजूद रहा। नायब तहसीलदार, पटवारी और निगम अधिकारी भी मौके पर थे। घंटों चली कार्रवाई के बाद सरकारी भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई गई।
लेकिन लोग पूछ रहे हैं—
जब बाउंड्री वॉल बन रही थी और खुलेआम प्लॉट बेचे जा रहे थे, तब प्रशासन क्यों चुप था?
करोड़ों की सरकारी जमीन के सौदे पर पहले अंकुश क्यों नहीं लगाया गया?
निर्दोष खरीदारों का भविष्य कौन संवारने वाला है?
एफआईआर की मांग और जनता की चेतावनी
स्थानीय नागरिकों ने साफ कहा कि मकान तोड़कर कार्रवाई पूरी नहीं होती। असली गुनहगारों—सीताराम चौहान (सांसद प्रतिनिधि), लक्ष्मण लहरे, राजू सिमोन और सूरज चौहान—पर कठोर धाराओं में एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। यदि दोषियों को बचाने की कोशिश की गई तो जनता सड़कों पर उतरेगी और सामूहिक रूप से कानूनी लड़ाई भी लड़ेगी।
निष्कर्ष : बुलडोजर से दीवारें टूटीं, लेकिन विश्वास भी टूटा
मानिकपुर डिपरापारा की कार्रवाई ने यह दिखा दिया कि प्रशासन अब अतिक्रमण पर सख्ती दिखाने का दावा कर रहा है। लेकिन असली सवाल यह है कि जब करोड़ों की सरकारी जमीन का सौदा हो रहा था, तब जिम्मेदार चुप क्यों रहे? निर्दोष खरीदारों की मेहनत की कमाई और उजड़े घरों का मुआवजा कौन देगा?
लोग अब सिर्फ जवाब ही नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

