March 15, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

खबरें जरा हट के

152 काल्पनिक मकानों का भंडाफोड़: कब होंगे ‘सफेदपोश’ और जिम्मेदार अधिकारी बेनकाब? केंद्रीय एजेंसियों से जांच की उठी मांग

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/  एसईसीएल दीपका विस्तार परियोजना के लिए मलगांव में हुए मुआवजा सर्वेक्षण में बड़ा घोटाला सामने आया है। कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर की गई जांच में 152 मकान कागजों में दर्ज पाए गए, जो भौतिक रूप से मौजूद ही नहीं थे। इस खुलासे के बाद प्रशासन ने इन फर्जी मुआवजों को निरस्त करने और यदि भुगतान हुआ है तो वसूली की कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। बावजूद इसके अब तक न तो किसी पर आपराधिक मामला दर्ज हुआ है और न ही दोषियों के नाम सार्वजनिक किए गए हैं।

सूत्रों की मानें तो इन ‘काल्पनिक मकानों’ के पीछे कई रसूखदार सफेदपोश, राजनीतिक पहुंच वाले और स्थानीय प्रभावशाली लोग शामिल हैं। वहीं सर्वेक्षण और मुआवजा पत्रक तैयार करने वाले अधिकारियों—एसईसीएल दीपका के कर्मचारियों से लेकर राजस्व व अन्य विभागों के अधिकारियों—की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। चूंकि मामला केंद्र सरकार के अधीन आने वाले मुआवजा फंड से जुड़ा है, इसलिए स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसियों से जांच की मांग तेज हो गई है।

घोटाले की परतें: तीन बार बनी मेजरमेंट बुक, फिर भी फर्जीवाड़ा

वर्ष 2022-23 में गठित सर्वेक्षण दल ने एसईसीएल दीपका के सहयोग से परिसंपत्तियों का सर्वेक्षण किया। कुल 1638 मेजरमेंट बुक तैयार की गईं। मई 2025 में जब मलगांव में स्थित परिसंपत्तियां हटाकर गांव का विस्थापन हुआ, तब खुलासा हुआ कि 152 मकान वास्तव में कभी अस्तित्व में ही नहीं थे।

78 मकानों की सूची एसईसीएल दीपका ने जारी की, जबकि 74 मकानों की सूची राजस्व अमले ने गूगल अर्थ की वर्ष 2018-2022 की तस्वीरों के आधार पर तैयार की। दोनों सूचियों के मिलान से यह साफ हो गया कि ये मकान सिर्फ कागजों पर थे।

अब सवाल यह उठ रहा है कि तीन बार मेजरमेंट बुक और मुआवजा पत्रक तैयार करने के बावजूद इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? क्या अधिकारियों ने जानबूझकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया या उन्होंने मैदानी अमले पर आंख मूंदकर भरोसा किया?

जिम्मेदार कौन? कब होगा पर्दाफाश?

भूमि अधिग्रहण व मुआवजा प्रकरण के लिए गठित जिला प्रशासन की टीम में एसईसीएल, राजस्व, लोक निर्माण, वन विभाग और उद्यान विभाग के दर्जनभर अधिकारी शामिल थे। पर अब तक यह साफ नहीं हुआ है कि:

✅ मेजरमेंट बुक किनके हस्ताक्षर से पास हुई?
✅ मुआवजा पत्रक पर किन अधिकारियों ने अनुमोदन दिया?
✅ 152 काल्पनिक मकान किन लोगों के नाम पर दर्ज हुए?
✅ क्या किसी ने मुआवजा उठा लिया या मंशा ही थी?

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, करीब 250 लोग ऐसे भी हैं जिनका मुआवजा पत्रक बना है लेकिन वे भुगतान लेने सामने नहीं आए। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि फर्जी मकानों की संख्या 152 से बढ़कर 250 तक पहुंच सकती है।

गिरोह बनाकर रचा गया खेल या लापरवाही?

घोटाले की गहराई को देखते हुए यह संदेह भी गहरा रहा है कि क्या यह सुनियोजित षड्यंत्र था? शिकायतें पिछले एक साल से कोरबा से लेकर रायपुर-दिल्ली तक पहुंचीं, लेकिन किसी स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई। अब जब गांव समतल हो चुका है और विस्थापित लोग चले गए हैं, तब यह घोटाला पूरी तरह उजागर हुआ है।

क्या होगी कार्रवाई?

मुआवजा घोटाले ने एसईसीएल और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों को इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

वर्तमान में सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि:

🔹 काल्पनिक मकानों के ‘कल्पनाकारों’ के नाम कब उजागर होंगे?
🔹 मुआवजा घोटाले के दोषियों पर कब दर्ज होगा आपराधिक प्रकरण?
🔹 कौन-कौन से अधिकारी इस साजिश में शामिल रहे?

 पारदर्शी जांच ही है समाधान

 इस घोटाले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि बिना उच्चस्तरीय जांच के सच्चाई सामने नहीं आएगी। जनता, विस्थापित परिवार और क्षेत्र के जागरूक नागरिक अब इस मामले में सख्त कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं ताकि दोषियों को बेनकाब कर कड़ी सजा दी जा सके।

More Stories

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.