आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर भाजपा बाँकी मोंगरा मंडल का कार्यक्रम सम्पन्न — लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प दोहराया




कोरबा, बाँकी मोंगरा | 25 जून 2025
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में याद किए जाने वाले आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी बाँकी मोंगरा मंडल द्वारा शक्ति केंद्र बूथ क्रमांक 86, सामुदायिक भवन पानी टंकी में विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम का नेतृत्व मंडल अध्यक्ष द्वारा किया गया, जबकि संयोजन की जिम्मेदारी अजीत केवट जी ने निभाई। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में भाजपा जिला उपाध्यक्ष श्री नारायण ठाकुर जी उपस्थित रहे।

🔷 कार्यक्रम की प्रमुख बातें:
मुख्य वक्ता नारायण ठाकुर ने 25 जून 1975 को लगे आपातकाल की पृष्ठभूमि, घटनाक्रम और प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह वह समय था जब देश की लोकतांत्रिक नींव को गहरी चोट पहुँची थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा घोषित आपातकाल में नागरिक अधिकारों को समाप्त कर दिया गया, विपक्षी नेताओं को जेलों में डाला गया और प्रेस की स्वतंत्रता पर कठोर अंकुश लगाया गया।

विशेष रूप से लोकनायक जयप्रकाश नारायण द्वारा चलाया गया संपूर्ण क्रांति आंदोलन उस समय की ऐतिहासिक घटना थी, जिसने जनता के अंदर लोकतंत्र के प्रति जागरूकता और संघर्षशीलता को जगाया।
कार्यक्रम में यह भी चर्चा हुई कि आपातकाल के दौरान लागू किए गए परिवार नियोजन कार्यक्रम जैसे कई सरकारी प्रयासों की क्रियान्वयन पद्धति को लेकर व्यापक आलोचना हुई थी।
मार्च 1977 में जब आम चुनाव हुए, तब देश की जनता ने मतदान के माध्यम से कांग्रेस को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया और जनता पार्टी की सरकार बनी। यह लोकतंत्र की शक्ति और जनता की चेतना की जीत थी।
लोकतंत्र के लिए संकल्प
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने “लोकतंत्र की रक्षा”, संविधान की मर्यादा बनाए रखने तथा किसी भी प्रकार की तानाशाही प्रवृत्ति का विरोध करने का सामूहिक संकल्प लिया।
मंडल अध्यक्ष ने इस अवसर पर कहा कि आज जबकि आपातकाल को 50 वर्ष हो चुके हैं, यह अत्यंत आवश्यक है कि हम उस इतिहास से सीख लेकर अपने लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव सजग रहें।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, वरिष्ठजन, युवाजन एवं महिलाएं उपस्थित रहीं।
यह आयोजन भारतीय जनता पार्टी द्वारा “काला दिवस” के रूप में आपातकाल की स्मृति में आयोजित राज्यव्यापी कार्यक्रमों की श्रृंखला का हिस्सा था।


