March 17, 2026

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नवा रायपुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का ऐलान — “31 मार्च 2026 तक देश नक्सलवाद से होगा मुक्त”, सुरक्षा बलों के पराक्रम को बताया स्वर्णिम इतिहास का हिस्सा

नवा रायपुर, 23 जून 2025
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/  केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ संवाद किया और नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई में उनके योगदान की सराहना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, केन्द्रीय गृह सचिव, निदेशक आसूचना ब्यूरो, डीजी बीएसएफ सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

श्री शाह ने कहा कि नक्सलवाद ने बीते चार दशकों से गरीबों और आदिवासियों के जीवन को प्रभावित किया है। लेकिन अब यह समाप्ति के कगार पर है। उन्होंने 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने की घोषणा करते हुए कहा, “मोदी जी के नेतृत्व में जब मार्च 2026 में देश नक्सलवाद से मुक्त होगा, वो क्षण आजादी के बाद के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक होगा।”

सुरक्षा बलों के पराक्रम को किया नमन

श्री शाह ने कहा कि सुरक्षा बलों ने न सिर्फ नक्सलियों के गढ़ों को ध्वस्त किया है, बल्कि माओवादी हिंसा की जड़ें भी उखाड़ फेंकी हैं। उन्होंने कोबरा टीम, डीआरजी, छत्तीसगढ़ पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों के साहस, शौर्य और बलिदान की सराहना करते हुए कहा, “जब नक्सलवाद से मुक्ति की विजय गाथा लिखी जाएगी, उसमें आपके परिश्रम, त्याग व बलिदान को स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जायेगा।”

उन्होंने कहा, “सेना के जवान जो ठान लेते हैं, वो पूरा करके दिखाते हैं। मैं उनके इसी जज्बे के बल पर यह ऐलान करता हूं कि देश 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त हो जाएगा।”

नक्सलवाद: एक विभीषिका

श्री शाह ने कहा कि पिछले 35 वर्षों में नक्सल हिंसा के कारण लगभग 40 हजार लोग मारे गए या स्थायी रूप से अपंग हो गए। यह एक सामाजिक त्रासदी रही, जिसने मूलभूत सुविधाओं — जैसे कि बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, पीने का पानी, शौचालय और औद्योगिक विकास — को नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों से दूर रखा।

उन्होंने कहा, “इतने वर्षों तक एक बड़ा क्षेत्र मानो गुलामी के कालखंड में जीता रहा, और इसका मूल कारण नक्सलवाद ही है।”

विकास से होगा लाल आतंक का खात्मा

श्री शाह ने कहा कि जहां-जहां नक्सलवाद का सफाया हुआ है, वहां केंद्र और राज्य सरकारें अनाज, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, स्वच्छ जल और अन्य सुविधाएं लेकर पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा, “हमारा प्रयास है कि गरीब, आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें स्थायी सुरक्षा दी जाए।”

उन्होंने एक बेहद मार्मिक टिप्पणी करते हुए कहा, “जब कोई बच्चा बंदूक की जगह पेंसिल पकड़ता है और ‘क, ख, ग’ लिखता है, तो केवल उस क्षेत्र का नहीं, बल्कि पूरे देश का भविष्य संवरता है।”

नक्सली हिंसा पर आधारित पुस्तक ‘लियोर ओयना’ का लोकार्पण

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने नक्सल हिंसा के शिकार निर्दोष आदिवासियों की पीड़ा और बस्तर के संघर्ष को उजागर करती पुस्तक ‘लियोर ओयना’ का लोकार्पण भी किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक नक्सलियों की वास्तविकता को समझने में मददगार होगी और “ह्यूमन राइट्स” के नाम पर नक्सलियों का महिमामंडन करने वालों के चेहरे से नकाब हटाने का काम करेगी।

शाह ने कहा, “यह किताब न केवल पीड़ितों की वेदना को समाज के सामने रखेगी, बल्कि बस्तर जैसे क्षेत्रों की असली स्थिति से देश को अवगत कराएगी।”

यह संवाद और घोषणाएं न केवल सुरक्षा बलों के हौसले को बुलंद करती हैं, बल्कि यह संकेत भी देती हैं कि केंद्र सरकार नक्सलवाद के सफाए को लेकर अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुकी है। विकास, सुरक्षा और शिक्षा के समन्वय से अब लाल आतंक के अंत की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है।

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