दंतेवाड़ा में शिक्षिका फरहाना रिज़वी ने डीईओ के आदेश को ठुकराया, प्रिंसिपल की कुर्सी से मोह नहीं छोड़ रहीं – राजनीतिक संरक्षण का आरोप




दंतेवाड़ा, 17 जून 2025।
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा राहुल दंतेवाड़ा ****/ जिले में एक बार फिर शासन-प्रशासन के आदेशों की अनदेखी और राजनीतिक रसूख के चलते नियमों की धज्जियां उड़ाने का मामला सामने आया है। कांग्रेस नेता शकील रिज़वी की पत्नी और शिक्षिका फरहाना रिजवी को प्राथमिक शाला रेका में स्थानांतरित किए जाने के आदेश के बावजूद आज उन्हें कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, एजुकेशन सिटी जवांगा में प्रिंसिपल की कुर्सी पर बैठा देखा गया।

शिक्षा विभाग द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश के अनुसार फरहाना रिजवी को उनकी वर्तमान पदस्थापना से हटाकर प्राथमिक शाला रेका भेजा गया है, लेकिन उन्होंने न तो आदेश का पालन किया और न ही आज अपने नवीन पदस्थापना स्थल पर उपस्थिति दी। इसके उलट, वे पूर्व की तरह ही शासकीय विद्यालय में प्राचार्य की कुर्सी संभाले रहीं और शाला प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया।

इस संबंध में जब जिला शिक्षा अधिकारी श्री एस.के. अंबस्टा से बात की गई, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा – “मैं क्या कर सकता हूँ? जिले के बड़े अधिकारी भी इस मामले में कुछ करने में सक्षम नहीं हैं। साफ है कि उन पर कोई न कोई दबाव जरूर है।” यह बयान स्पष्ट करता है कि राजनीतिक दबाव और संरक्षण किस हद तक प्रशासनिक निर्णयों को प्रभावित कर रहा है।
स्थानीय नागरिकों और शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि फरहाना रिजवी के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए ताकि शिक्षा व्यवस्था की गरिमा बनी रहे और बाकी शिक्षक भी आदेशों का पालन करें। संलग्नकरण (अटैचमेंट) समाप्त किए जाने का निर्णय प्रशासन द्वारा सराहनीय कदम माना जा रहा है, जिससे वर्षों से मलाईदार पदों पर जमे विशेषज्ञ शिक्षकों की मनमानी पर रोक लगेगी।

राजनीतिक रसूख और आपराधिक आरोपों से घिरा है परिवार
बताया जा रहा है कि फरहाना रिजवी के पति शकील रिजवी कांग्रेस सरकार में मदरसा बोर्ड का सदस्य रहा है और जगदलपुर विधानसभा का प्रभारी भी रह चुका है। वह वर्तमान में दंतेवाड़ा में निवास करता है और उसका एक राइस मिल भी है। शकील रिजवी पर पीडीएस चावल घोटाले में संलिप्तता के गंभीर आरोप हैं – उसके ट्रकों से दो बार शासकीय चावल बरामद हो चुके हैं और एफआईआर भी दर्ज की गई है, किंतु राजनीतिक संरक्षण के चलते वह फरारी के बाद भी कार्रवाई से बचता रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शकील रिजवी भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ कई बार मारपीट और गुंडागर्दी में भी शामिल रहा है। पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर और वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज से निकटता बताकर वह आज भी क्षेत्र में दबदबा बनाए हुए है।
समाज में बढ़ती नाराजगी
इस पूरे घटनाक्रम से आमजन और शिक्षक वर्ग में भारी नाराजगी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब नियम कानून आम शिक्षकों पर पूरी कठोरता से लागू होते हैं, तब नेताओं और उनके परिजनों को विशेष छूट क्यों? शिक्षा के मंदिर में यदि आदेशों की अवहेलना कर रसूख चलाया जाएगा, तो छात्र हित की बात केवल एक छलावा बनकर रह जाएगी।
यह मामला न केवल शिक्षा व्यवस्था की गंभीरता को चुनौती देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्रशासन यदि राजनीतिक दबाव में झुकता है, तो आम जनता का भरोसा कमजोर होता है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है – क्या कानून का डंडा एक रसूखदार शिक्षिका तक पहुंचेगा, या फिर यह मामला भी चुपचाप फाइलों में दब जाएगा?


