“हर पात्र को उसका अधिकार” — समाधान शिविर में 6297 आवेदनों का शत-प्रतिशत निराकरण, विधायक प्रेमचंद पटेल बोले: शासन की योजनाओं का लाभ सभी को मिले




त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ छत्तीसगढ़ शासन की मंशा के अनुरूप प्रदेशभर में चल रहे “सुशासन तिहार 2025” के अंतर्गत, कोरबा जिले के हरदीबाजार स्थित स्वामी आत्मानंद हायर सेकेंडरी स्कूल में समाधान शिविर के तीसरे और अंतिम चरण का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
इस शिविर में 11 ग्राम पंचायतों से प्राप्त कुल 6297 आवेदनों का शत-प्रतिशत निराकरण किया गया — जो प्रशासन की तत्परता और जवाबदेही का उदाहरण प्रस्तुत करता है।

🏵️ शुभारंभ समारोह:
कार्यक्रम की शुरुआत छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। मुख्य अतिथि के रूप में कटघोरा विधायक श्री प्रेमचंद पटेल उपस्थित रहे। साथ ही जनपद पंचायत पाली की अध्यक्ष श्रीमती पूर्णिमा शोभा सिंह जगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती निकिता मुकेश जायसवाल, एसडीएम पाली एवं नोडल अधिकारी श्रीमती सीमा पात्रे, सहायक नोडल अधिकारी श्री भूपेंद्र कुमार सोनवानी, जनपद सीईओ, जनप्रतिनिधि, विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंच, विभागीय अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित रहे।
🗣️ विधायक श्री प्रेमचंद पटेल ने कहा:
> “सरकार का संकल्प है कि कोई भी पात्र व्यक्ति योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। इसी उद्देश्य को लेकर समाधान शिविरों का आयोजन गांव-गांव किया जा रहा है, ताकि लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके और योजनाएं सही लोगों तक पहुँचें।”
📝 प्रमुख बिंदु:
🔹 11 ग्राम पंचायतों के 6297 आवेदन पूरी तरह निराकृत
🔹 वन अधिकार पत्र पात्र हितग्राहियों को वितरण
🔹 राजस्व विभाग द्वारा 4 किसानों को ‘किसान किताब’ प्रदान
🔹 जनसमस्याओं का त्वरित समाधान, योजनाओं की जानकारी सीधे हितग्राहियों तक पहुंचाई गई
👩💼 एसडीएम श्रीमती सीमा पात्रे ने कहा:
> “समाधान शिविर आम जनता की समस्याओं को जमीनी स्तर पर हल करने का एक प्रभावी माध्यम है। यह प्रयास शासन की पारदर्शिता और जनउत्तरदायित्व को सिद्ध करता है।”
🤝 आभार ज्ञापन:
जनपद पंचायत पाली के सीईओ ने सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्रामीणजनों को सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया और भविष्य में भी इसी तरह सहभागिता के साथ कार्य करने की अपील की।
🔚 निष्कर्ष:
यह समाधान शिविर सुशासन और सेवा का प्रभावी उदाहरण बनकर उभरा, जहां योजनाएं केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि हर पात्र नागरिक तक सीधे पहुंचने में सफल रहीं।


