August 14, 2026

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पुरुषोत्तम मास का आध्यात्मिक महत्व : पूजा, दान, व्रत और सात्विक जीवन से मिलता है विशेष पुण्य

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भगवान विष्णु की आराधना, दान-पुण्य और संयम का महीना माना जाता है पुरुषोत्तम मास, जानिए क्या करें और क्या न करें
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। इसे अधिक मास भी कहा जाता है, जो लगभग हर तीन वर्ष में एक बार आता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस माह को स्वयं भगवान Vishnu ने अपना नाम “पुरुषोत्तम” प्रदान किया था, इसलिए यह महीना भगवान विष्णु की विशेष आराधना के लिए समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस महीने में पूजा-पाठ, जप, तप, दान और संयम से किए गए कार्यों का कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है।
पुरुषोत्तम मास में सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और घर के पूजा स्थल को स्वच्छ रखना अत्यंत शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और माता लक्ष्मी की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है। पूजा में तुलसी दल, पीले फूल, चंदन, धूप, दीप, फल, पंचामृत और भोग अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस माह में “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
पूजा के लिए सामान्यतः पीला वस्त्र, दीपक, घी, कपूर, तुलसी पत्ता, केले, मौसमी फल, मिठाई, गंगाजल और प्रसाद की आवश्यकता होती है। कई श्रद्धालु इस माह में विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भागवत कथा, भगवद्गीता पाठ और रामचरितमानस का नियमित पाठ भी करते हैं। शाम के समय तुलसी के पास दीप जलाना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार पुरुषोत्तम मास में दान का विशेष महत्व होता है। इस दौरान अन्नदान, जलदान, वस्त्रदान, गौसेवा और जरूरतमंदों की सहायता करना पुण्यदायी माना जाता है। गर्मी और वर्षा के मौसम को देखते हुए गरीबों को छाता, चप्पल, पानी के बर्तन, फल और भोजन दान करना भी शुभ माना जाता है। मंदिरों में प्रसाद वितरण और पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करना भी पुण्य कार्यों में शामिल है।
खानपान की बात करें तो इस माह में सात्विक भोजन को सबसे उत्तम माना गया है। भोजन में मूंग दाल, खिचड़ी, रोटी, हरी सब्जियां, लौकी, तोरई, परवल, फल, दूध, दही और सूखे मेवे शामिल करना लाभकारी माना जाता है। अधिक तला-भुना, मांसाहार, शराब और अत्यधिक मसालेदार भोजन से बचने की सलाह दी जाती है। कई श्रद्धालु एक समय भोजन या फलाहार रखकर व्रत भी करते हैं।
पीने के लिए नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी, बेल का शरबत, सादा पानी और ताजे फलों का रस स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार इस मौसम में शरीर को हाइड्रेट और पाचन को संतुलित रखना आवश्यक होता है।
धार्मिक मान्यता है कि पुरुषोत्तम मास आत्मशुद्धि, संयम, सेवा और भक्ति का प्रतीक है। इस दौरान क्रोध, झूठ, अपशब्द और नकारात्मक विचारों से दूर रहकर सकारात्मक जीवन अपनाने का प्रयास करना चाहिए। श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा-अर्चना से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आने की मान्यता है।

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