March 18, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

खबरें जरा हट के

मोहिनी एकादशी व्रत: मोह से मोक्ष की ओर – पुण्य, पावनता और परंपरा का पर्व 8 मई को

।।ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।।

त्रिनेत्र टाइम्स  कोरबा,****/ 7 मई 2025 – बैसाख मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे मोहिनी एकादशी कहा जाता है, इस वर्ष 8 मई 2025, गुरुवार को श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक विधि-विधान के साथ मनाई जाएगी। यह एकादशी सभी 24 एकादशियों में विशेष महत्व रखती है, जो व्रती को मोह, पाप और सांसारिक बंधनों से मुक्त कर मोक्ष की ओर ले जाती है।

शुभ मुहूर्त और व्रत तिथि विवरण:
वैशाख शुक्ल एकादशी तिथि की शुरुआत 7 मई, बुधवार को प्रात: 10:19 बजे से होगी और इसका समापन 8 मई, गुरुवार को दोपहर 12:29 बजे होगा। उदया तिथि को मानते हुए व्रत 8 मई को रखा जाएगा, जबकि व्रत का पारण 9 मई शुक्रवार को प्रात: 5:34 बजे से 8:16 बजे तक किया जाएगा।

धार्मिक महत्व और लाभ:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मोहिनी एकादशी व्रत का पालन करने से व्यक्ति सभी पापों से मुक्त हो जाता है। भगवान विष्णु की पूजा इस दिन विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। इस दिन कथा श्रवण या पाठ करने से हजार गायों के दान के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। ऐसा भी कहा गया है कि वृद्ध, बीमार या बालक भले ही उपवास न रखें, लेकिन उन्हें एकादशी के दिन चावल का त्याग अवश्य करना चाहिए, क्योंकि धार्मिक शास्त्रों में इसे पाप के समान माना गया है।

व्रत विधि:

  • प्रात:काल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें।
  • घर के मंदिर की सफाई कर दीपक जलाएं।
  • भगवान विष्णु का गंगाजल से अभिषेक करें, वस्त्र पहनाएं।
  • सात्विक भोग अर्पित करें, जिसमें तुलसी का पत्ता अनिवार्य हो।
  • विष्णु सहस्त्रनाम, व्रत कथा व भजन-कीर्तन करें।

मोहिनी एकादशी की पौराणिक कथा:
इस व्रत से जुड़ी कथा धर्मराज युधिष्ठिर द्वारा भगवान श्रीकृष्ण से पूछे गए प्रश्न से प्रारंभ होती है। श्रीकृष्ण बताते हैं कि महर्षि वशिष्ठ ने यह कथा श्रीराम को सुनाई थी। इसमें एक धर्मनिष्ठ वैश्य के पापी पुत्र धृष्टबुद्धि का वर्णन है, जो पापों में लिप्त रहने के कारण सब कुछ खो देता है और वन में भटकता हुआ कौडिन्य मुनि के आश्रम पहुँचता है। ऋषि द्वारा सुझाए गए मोहिनी एकादशी व्रत को कर वह समस्त पापों से मुक्त होता है और अंत में विष्णुलोक को प्राप्त करता है।

इस व्रत का उद्देश्य केवल व्रत या पूजा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और सच्चे अर्थों में आध्यात्मिक जागरण है। मोहिनी एकादशी का पालन जीवन से मोह, अज्ञान और अधर्म को दूर कर सच्चे धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

– डॉ. नागेन्द्र नारायण शर्मा, नाड़ीवैद्य


क्या आप चाहेंगे कि इस सम

More Stories

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.