“कोरबा में पहली बार राज्य स्तरीय सर्पदंश प्रबंधन कार्यशाला का आयोजन, 350 से अधिक चिकित्सकों ने लिया भाग”



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ कोरबा। वन्यजीव संरक्षण और सर्पदंश के प्रभावी प्रबंधन को लेकर कोरबा वन मंडल एवं नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में राज्य स्तरीय सर्पदंश जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला किंग कोबरा कंजर्वेशन प्रोजेक्ट के अंतर्गत हुई, जिसमें स्वास्थ्य विभाग, एसईसीएल, वेदांता बालको सहित विभिन्न संस्थानों ने सहयोग प्रदान किया।
कार्यक्रम में गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में कई गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया, जिनमें प्रमुख रूप से –
- कोरबा जिला नगर निगम महापौर संजू देवी राजपूत
- कोरबा जिला कलेक्टर अजीत वसंत
- डीएफओ अरविंद पीएम
- कटघोरा डीएफओ कुमार निशांत
- नगर निगम आयुक्त आशुतोष पांडेय
- सीएमओ एस.एन. केशरी
- नगर पालिका अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राजपूत
- भाजपा जिला अध्यक्ष मनोज शर्मा
- भाजपा महामंत्री संतोष देवेंगन
इसके अलावा, छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आए 350 से अधिक चिकित्सक, 30 रेस्क्यूर्स और मेडिकल कॉलेज के छात्र भी कार्यशाला में सम्मिलित हुए।
कार्यशाला की मुख्य बातें
कार्यशाला का उद्घाटन वन मंडल अधिकारी अरविंद पीएम द्वारा किया गया, जिन्होंने किंग कोबरा कंजर्वेशन प्रोजेक्ट की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य संकटग्रस्त किंग कोबरा प्रजाति का संरक्षण और सर्पदंश से बचाव हेतु व्यापक जागरूकता फैलाना है।
नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी के एम. सूरज ने सर्पदंश की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए इसके समाधान के लिए वन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, राजस्व विभाग और आशा कार्यकर्ताओं के सामूहिक सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया।
स्वास्थ्य विभाग के सीएमओ एस.एन. केशरी ने बताया कि पिछले 30 वर्षों में पहली बार इस विषय पर इतनी व्यापक कार्यशाला आयोजित की गई है। यह हेल्थ वर्कर्स को प्रशिक्षित करने और सर्पदंश के बेहतर प्रबंधन में सहायक सिद्ध होगी।
विशेषज्ञों द्वारा महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा की गईं
कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने सर्पदंश की रोकथाम, उपचार एवं सरकारी योजनाओं पर महत्वपूर्ण जानकारियाँ दीं –
- चैतन्य मालिक (संगवारी संस्था, सरगुजा):
- सर्पदंश के प्रभावी प्रबंधन हेतु सही मौसम और उपचार पद्धतियों की जानकारी।
- डॉ. कृष्ण दत्त चावली (एम्स, रायपुर):
- प्राथमिक उपचार, विषैले एवं विषहीन सर्पदंश की पहचान, फॉरेंसिक प्रक्रिया और मुआवजा प्राप्त करने की विधियाँ।
- विवेक शर्मा (सर्प विशेषज्ञ):
- सांपों की पहचान, छत्तीसगढ़ में उनकी उपलब्धता और विष की तीव्रता संबंधी विस्तृत जानकारी।
- सविता सिदार (नायब तहसीलदार, कोरबा):
- सरकारी मुआवजा प्रक्रिया और उसके लिए आवश्यक नियमों की विस्तृत जानकारी।
NAPSE और भारत सरकार का लक्ष्य
नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी के एम. सूरज ने NAPSE (National Action Plan for Snakebite Envenoming) पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत सरकार ने 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मृत्यु को आधा करने का लक्ष्य रखा है।
इसके साथ ही, हाल ही में भारत सरकार ने सर्पदंश को एक नोटिफाएबल बीमारी घोषित करने का प्रस्ताव भी दिया है।
विशेषज्ञों का सम्मान एवं समापन
कार्यशाला के अंत में विशेषज्ञों को किंग कोबरा की फोटो स्मृति चिन्ह के रूप में भेंट की गई। यह कार्यशाला न केवल चिकित्सकों एवं बचाव दलों के प्रशिक्षण हेतु एक महत्वपूर्ण अवसर बनी, बल्कि सर्पदंश से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने और सही जानकारी फैलाने में भी सहायक सिद्ध हुई।


