होली से पहले होलाष्टक शुरू: शुभ कार्यों पर लगा विराम, जानिए इसका महत्व



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा वाराणसी, 7 मार्च 2025: फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होलिका दहन तक चलने वाले होलाष्टक की शुरुआत हो चुकी है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन जैसे शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह आठ दिन अशुभ होते हैं, क्योंकि इन्हीं दिनों में भक्त प्रह्लाद को हिरण्यकशिपु ने कठोर यातनाएं दी थीं।
क्या है होलाष्टक?
होलाष्टक फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से लेकर पूर्णिमा तक चलता है। इस वर्ष होलाष्टक 16 मार्च से 24 मार्च 2025 तक रहेगा। ज्योतिष के अनुसार, इस दौरान सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु-केतु की स्थिति अशुभ मानी जाती है, जिससे मांगलिक कार्यों की निषेधता होती है।
क्या करें और क्या न करें?
✅ करें:
- इस दौरान भगवान विष्णु और नरसिंह भगवान की पूजा करें।
- होलिका दहन की तैयारी करें और सकारात्मक ऊर्जा के लिए मंत्र जाप करें।
- जरूरतमंदों को दान करें, जिससे नकारात्मक प्रभाव कम हो सके।
❌ न करें:
- विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ जैसे शुभ कार्यों से बचें।
- नए व्यापार या किसी बड़े निवेश की शुरुआत न करें।
- घर में झगड़े और वाद-विवाद से बचें।
होलाष्टक का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, हिरण्यकशिपु ने इन आठ दिनों में भक्त प्रह्लाद को प्रताड़ित किया था, लेकिन विष्णु जी ने उसकी रक्षा की। यही कारण है कि यह समय अशुभ माना जाता है और शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है।
कैसे करें होलाष्टक में पूजा?
- भगवान नरसिंह और विष्णु की विशेष पूजा करें।
- घर में गंगाजल का छिड़काव करें और सात्विक भोजन ग्रहण करें।
- होलिका दहन के दिन कष्टों से मुक्ति के लिए नारियल और गेंहू अर्पित करें।
होलाष्टक के समापन के बाद 13 मार्च को होलिका दहन और 14 मार्च को रंगों की होली खेली जाएगी। इस अवधि में धार्मिक नियमों का पालन करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।



