February 13, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

खबरें जरा हट के

*पापांकुशा एकादशी व्रत का शुभ मुहूर्त*

*एकादशी तिथि का आरंभ -13 अक्टूबर 2024 रविवार को प्रात: 09 बजकर 08 मिनट से*

*एकादशी तिथि का समापन – 14 अक्टूबर 2024 सोमवार को प्रात: 06 बजकर 41 मिनट पर*

*उदया तिथि (द्वादशी युक्त) 14 अक्टूबर को है।अत: व्रत भी इसी तिथि के आधार पर 14 अक्टूबर 2024 सोमवार को रखना चाहिये।*

*एकादशी व्रत का पारण- 15 अक्टूबर 2024 मंगलवार को प्रात: 06 बजकर 23 मिनट से प्रात: 08 बजकर 41 मिनट के मध्य*

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा     नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा*      *आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहते हैं।एकादशी तिथि जगत के पालनहाल भगवान विष्णु की प्रिय मानी जाती है। इस बार पापांकुशा एकादशी 14 अक्टूबर 2024 सोमवार को है। शास्त्रों के अनुसार जो पापांकुशा एकादशी का व्रत रखता है भगवान विष्णु उसके सभी मनोरथ पूर्ण करते हैं। साथ ही उसे मृत्यु के बाद यमलोक में यमराज के अत्याचार नहीं झेलने पड़ते।एकादशी व्रत के प्रभाव से साधक और उसके पितरों को मोक्ष मिलता है। किसी भी व्रत, पूजा-पाठ में कथा का विशेष महत्व होता है. पापांकुशा एकादशी पर भी व्रत का फल तभी मिलता है जब कथा का श्रवण किया जाए।*

*पापांकुश एकादशी व्रत की कथा*

*पौराणिक कथा के अनुसार एक समय विध्‍यांचल पर्वत पर क्रोधना नाम का एक बहुत ही क्रूर शिकारी रहता था।अपने जीवन में उसने कई पशु-पक्षियों का शिकार किया। कई गलत कर्म और बेजुबान जीवों की को मारकर वह पाप का भागी बन चुका था। जब उसका अंतिम समय आया तो मृत्यु के डर से वह सहमा हुआ अंगिरा ऋषि के पास पहुंचा. क्रोधना ने महर्षि से बोला मैंने जीवन भर पाप कर्म ही किए हैं, मुझे नर्क जाना पड़ेगा।आप ऐसा कोई उपाय बताएं, जिससे मेरे सारे पाप मिट जाएं और मोक्ष की प्राप्ति हो।अंगिरा ऋषि ने उसे पापांकुशा एकादशी के महत्व के बारे में बताया और इस व्रत को रखने की बात कही।ऋषि के कहे अनुसार उसने व्रत रखकर विधि विधान से श्रीहरि की आराधना की। व्रत के प्रभाव से उसे समस्त पाप कर्म से छुटकारा मिल गया और उसे बैकुंठ की प्राप्ति हुई।*

*एकादशी पर ना करें ये काम*
*पापांकुशा एकादशी तिथि का व्रत रख रहे हैं या परिवार में कोई रह रहा है तो दशमी तिथि से ही चावल और तामसिक भोजन से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।*
*दशमी पर सात तरह के अनाज, इनमें गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर की दाल नहीं खानी चाहिए, क्योंकि इन सातों अनाजों की पूजा एकादशी के दिन की जाती है।*
*पापांकुशा एकादशी पर ईश्वर का भजन और स्मरण रखने का विधान है। व्रत करने वालों को क्रोध, अहंकार, झूठ, फरेब आदि चीजों से दूर रहना चाहिए। साथ ही इस दिन सोना, तिल, गाय, अन्न, जल आदि चीजों का दान करना बहुत शुभ माना गया है।*

*पापांकुशा एकादशी के व्रत में भूलकर भी क्रोध नहीं करना चाहिए।वरना पूजा-व्रत का फल नहीं मिलता।*

 

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