कोरबा सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी कर रहे अनिश्चितकालीन आंदोलन



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा आठ माह से वेतन लंबित होने सहित दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सुरक्षा का आरोप लगा चिंतित स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) तीन सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन में चले गए हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हो रही है।
जानकारी के अनुसार जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रमुख रूप से ग्रामीण क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों में बीपी-शुगर, सिकलिंग की जांच व प्राथमिक उपचार के साथ ही क्षेत्रों में टेलीमेडीसीन, स्वास्थ्य मेला में चिकित्सकीय सेवा के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) की पदस्थापना की है। इनमें करीब 90 प्रतिशत महिलाएं पदस्थ हैं। आरोप लगाते हुए बताया गया हैं की स्वास्थ्य विभाग की ओर से उनका कार्य आधारित वेतन का भुगतान आठ माह से नहीं हुआ है। इस कारण वे परेशान हैं। साथ ही दूरस्थ क्षेत्रों में पदस्थ होने से असुरक्षित भी रहते हैं। अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी ध्यान नहीं देने पर जिले के सभी 160 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ के बैनर तले अनिश्चिकालीन आंदोलन शुरू कर दिया है। इसके तहत वे सभी काम बंद कर शहर के आईटीआई चौक पर पंडाल लगाकर अपनी मांग को लेकर आंदोलनरत हैं।
* मांग पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष उमाशंकर धर्मा ने बताया कि अधिकारियों को कार्य आधारित वेतन प्रतिमाह 15 तारीख तक देने का प्रावधान होने के बाद भी विभाग के उच्च अधिकारियों ने लगभग आठ माह से नहीं दिया है। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के रूप में 90 प्रतिशत महिला अधिकारी हैं, जिनकी सुरक्षा के लिए उन्हें गृह जिलों में स्थानांतरण करना चाहिए। इसी तरह कांकेर में प्रकोष्ठ के जिला संयोजक पवन वर्मा की सेवा समाप्ति गलत तरीके से की गई है, जिसे वापस लेना चाहिए। इस तरह उक्त तीन बिंदु पर मांग रखते हुए प्रकोष्ठ द्वारा आंदोलन किया जा रहा है। मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

