February 13, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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अक्षय तृतीया*
*वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया कहा जाता है।अक्षय तृतीया तिथि इस वर्ष 10 मई 2024 शुक्रवार को सुबह 4 बजकर 17 मिनट पर आरंभ होगी। तृतीया तिथि का समापन 11 मई को सुबह 02 बजकर 50 मिनट पर होगा। उदय तिथि के अनुसार अक्षय तृतीया 10 मई शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों ही अपनी उच्च राशि में स्थित होते हैं, और शुभ परिणाम देते हैं। इन दोनों की सम्मिलित कृपा का फल अक्षय होता है।*
*पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु ने अपने छठे अवतार के रूप में इस दिन ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के यहां जन्म लिया था। परशुराम का नाम राम था किन्तु परशुराम भगवान शिव को अपनी कठोर तपस्या से प्रसन्न किया जिससे उन्हें वरदान में अस्त्र के रूप में अपना फरसा अर्थात परशु दिया जिसके बाद वे भगवान परशुराम कहलाए। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान परशुराम ने क्षत्रियों का दंभ चूर करने के लिये 21 बार उनका संहार किया।*

*दान-पुण्य का महत्व*

*अक्षय तृतीया के दिन ही महर्षि वेदव्यास ने महाभारत लिखना शुरू किया था तथा युधिष्ठिर को अक्षय पात्र भी आज ही के दिन मिला था। मान्यताओं के मुताबिक इस पात्र का भोजन कभी समाप्त नहीं होता । यह मान्यता भी है कि इस दिन किया जाने वाला दान-पुण्य कभी क्षय नहीं होता वहीं आज के दिन किया गया जप तप भी नाश नहीं होता उसका पुण्यफल अक्षय रहता है।*
*अक्षय तृतीया पर मूल्यवान वस्तुओं की खरीदारी और दान-पुण्य के कार्य भी शुभ माने गए हैं। विशेषकर सोना खरीदना, एवं जल का दान करना इस दिन सबसे ज्यादा शुभ होता है। इससे धन की प्राप्ति और दान का पुण्य अक्षय बना रहता है।*

*अक्षय तृतीया का महत्व*
*ऐसी मान्यताएं हैं कि अक्षय तृतीया पर सोने-चांदी की चीजें खरीदने से व्यक्ति का भाग्योदय होता है। इसके अलावा, पवित्र नदियों में स्नान, दान, ब्राह्मण भोज, श्राद्ध कर्म, यज्ञ और ईश्वर की उपासना जैसे उत्तम कार्य इस तिथि पर अक्षय फलदायी माने गए हैं। धार्मिक मान्यता अनुसार, इस दिन शुरू किया गया कोई भी कार्य निर्विघ्नता से संपन्न हो जाता है और उसका फल अक्षय होता है। इस दिन अबूझ मुहूर्त होता है अर्थात कोई भी शुभ मुहूर्त देखे बिना किसी भी शुभ कार्य को संपन्न कर सकते हैं।*

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