अंत्योदय से राष्ट्रोदय की राह दिखाने वाले पंडित दीनदयाल उपाध्याय को मुख्यमंत्री साय ने किया नमन
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“समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना ही सच्चे अंत्योदय की पहचान” : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**// रायपुर, 25 सितंबर 2026। एकात्म मानववाद के प्रणेता, प्रखर राष्ट्रचिंतक एवं राष्ट्रसेवा के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर उनके राष्ट्र एवं समाज के प्रति योगदान को स्मरण किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय चिंतन और राष्ट्र निर्माण को ऐसी दिशा दी, जिसमें विकास का केंद्र समाज का अंतिम व्यक्ति रहा। उनका जीवन राष्ट्रसेवा, जनकल्याण तथा गरीब, वंचित और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित रहा। उन्होंने समाज के उस व्यक्ति की चिंता को विकास की कसौटी बनाया, जो सुविधाओं और अवसरों की अंतिम पंक्ति में खड़ा है।
उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का ‘अंत्योदय’ केवल एक विचार नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान, अवसर और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का संकल्प है। उनके अनुसार विकास तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और वह आत्मनिर्भर एवं सशक्त बन सके।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती को ‘अंत्योदय दिवस’ के रूप में मनाना उनके विचारों को जनकल्याण के संकल्प से जोड़ने का अवसर है। एकात्म मानववाद और अंत्योदय का उनका दर्शन आज भी राष्ट्र निर्माण तथा समाज के सर्वांगीण विकास के लिए मार्गदर्शक है।
उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों और आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए छत्तीसगढ़ सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण और विकास के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि विकास की योजनाओं और उनके लाभ से कोई भी व्यक्ति वंचित न रहे तथा समाज के अंतिम व्यक्ति तक शासन की पहुंच सुनिश्चित हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का राष्ट्रसेवा का भाव, एकात्म मानववाद की विचारधारा और अंत्योदय का संकल्प आने वाली पीढ़ियों को भी निरंतर प्रेरित करता रहेगा। उनके विचारों को जनकल्याण के कार्यों में आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।







