कांग्रेस के भीतर उठते विरोध पर सीएम साय का करारा वार—“दूसरों पर सवाल से पहले अपने संगठन की हालत देखे कांग्रेस”
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कथनी-करनी के अंतर ने जनता का भरोसा छीना, चुनाव दर चुनाव कांग्रेस को मिला जनादेश : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**//रायपुर, 22 सितंबर 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कांग्रेस के संगठनात्मक हालात और उसकी राजनीतिक कार्यशैली को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस को दूसरों पर सवाल उठाने से पहले अपने संगठन के भीतर चल रहे विरोध और अंतर्कलह पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेताओं को अपने ही लोगों के बीच विरोध और असंतोष का सामना क्यों करना पड़ रहा है, इस पर पार्टी नेतृत्व को आत्ममंथन करना चाहिए।
पत्रकारों से चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इससे पहले वे पंजाब के प्रभारी रहे, जहां उनके विरोध की बातें सामने आई थीं। अब उन्हें पहली बार असम का प्रभारी बनाया गया है और वहां भी विरोध की स्थिति सामने आने की बात कही जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परिस्थितियों को कांग्रेस को गंभीरता से देखना चाहिए और यह समझने का प्रयास करना चाहिए कि आखिर उसके अपने संगठन में ऐसी परिस्थितियां क्यों बन रही हैं।
“जनता ने वादे नहीं, काम और परिणाम देखकर फैसला किया”
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कांग्रेस की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है। पार्टी जनता से अनेक वादे करती है, लेकिन उन्हें पूरा करने में विफल रहती है। उनके अनुसार यही वजह है कि जनता का कांग्रेस से लगातार विश्वास कम हुआ है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता ने कांग्रेस के पांच वर्ष के शासन को देखा और उसके बाद अपने मत के माध्यम से स्पष्ट निर्णय दिया। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई। इसके बाद लोकसभा चुनाव के साथ ही नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में भी कांग्रेस को जनता के फैसले का सामना करना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ा निर्णायक होती है। केवल घोषणाओं और वादों से जनता का भरोसा कायम नहीं रहता, बल्कि जनता काम, नतीजों और जमीनी प्रदर्शन के आधार पर अपना निर्णय करती है।
पहले अपना घर संभाले कांग्रेस : साय
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कांग्रेस को दूसरों पर आरोप लगाने और सवाल खड़े करने के बजाय पहले अपने संगठन की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। पार्टी के भीतर सामने आ रहे विरोध, अंतर्कलह और असंतोष की स्थितियों का समाधान करना कांग्रेस की प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब किसी राजनीतिक संगठन के भीतर ही विरोध के स्वर उठते हैं, तो उसे दूसरों पर सवाल उठाने से पहले अपने संगठन की परिस्थितियों का मूल्यांकन करना चाहिए। मुख्यमंत्री के इस बयान ने कांग्रेस के संगठनात्मक विवादों को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।







