November 7, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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अंधकार पर प्रकाश और निराशा पर आशा की विजय का महापर्व आज; मां लक्ष्मी के स्वागत में सजेंगे घर-द्वार, भगवान गणेश और कुबेर की होगी आराधना, व्यापारी करेंगे बही-खाता, तिजोरी और व्यापारिक प्रतिष्ठानों का पूजन

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// कोरबा। सुख-समृद्धि, धन-वैभव, आस्था और उल्लास का महापर्व दीपावली आज रविवार, 8 नवंबर को पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। सनातन धर्म में दीपावली का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इस दिन घर-घर में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है। शाम होते ही घरों, मंदिरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों में दीपों की रोशनी तथा आकर्षक विद्युत सजावट उत्सव की रौनक बढ़ाएगी।

दीपावली केवल दीप जलाने और मिठाइयां बांटने का त्योहार नहीं, बल्कि जीवन में अंधकार को दूर कर ज्ञान, सकारात्मकता, प्रेम और सद्भाव का प्रकाश फैलाने का संदेश देने वाला पर्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर लंका विजय के बाद अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने पूरी नगरी को दीपों से सजाया था। इसी परंपरा की स्मृति में दीपावली पर दीप प्रज्वलित किए जाते हैं। समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी के प्राकट्य की धार्मिक मान्यता के कारण भी इस दिन उनका विशेष पूजन किया जाता है।

आज लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त

कोरबा के स्थानीय समय के अनुसार 8 नवंबर 2026 को मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के लिए प्रमुख शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 43 मिनट से रात 7 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। लगभग 1 घंटा 59 मिनट की इस अवधि में प्रदोष काल और स्थिर वृषभ लग्न का संयोग बताया गया है।

प्रमुख पंचांग विवरण

– दीपावली एवं लक्ष्मी पूजन : रविवार, 8 नवंबर 2026।
– लक्ष्मी पूजन का शुभ समय : शाम 5:43 से रात 7:41 बजे तक।
– प्रदोष काल : शाम 5:18 से 7:52 बजे तक।
– अमावस्या तिथि प्रारंभ : सुबह 11:27 बजे।
– अमावस्या तिथि समाप्त : 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे।

धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में मां लक्ष्मी की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा करें।

मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश और कुबेर की पूजा का महत्व

दीपावली पर मां लक्ष्मी को धन, ऐश्वर्य और समृद्धि की देवी माना जाता है। भगवान गणेश बुद्धि, विवेक और विघ्नों को दूर करने वाले देवता हैं। वहीं भगवान कुबेर को धन का अधिपति माना जाता है। इसीलिए दीपावली की पूजा में मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर का विशेष स्मरण किया जाता है। अनेक परिवारों में मां सरस्वती की भी पूजा की जाती है।

दीपावली पर पूजा कैसे करें?

सबसे पहले घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई कर स्नान करें तथा स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर चौकी रखकर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। पास में जल से भरा कलश रखें।

इसके बाद रोली, अक्षत, चंदन, फूल, माला, धूप, दीप और नैवेद्य तैयार करें। भगवान गणेश का स्मरण कर पूजा प्रारंभ करें। इसके बाद मां लक्ष्मी को तिलक, पुष्प, फल और मिठाई अर्पित करें। भगवान कुबेर का स्मरण करें। लक्ष्मी मंत्र, गणेश वंदना और लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें। अंत में परिवार के सभी सदस्य मिलकर आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

पूजा के प्रमुख मंत्र

मां लक्ष्मी मंत्र : ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।

भगवान गणेश मंत्र : ॐ गं गणपतये नमः।

मां लक्ष्मी को कौन-कौन से भोग लगाएं?

दीपावली पर मां लक्ष्मी को शुद्ध एवं सात्विक भोग अर्पित करने की परंपरा है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य और पारिवारिक परंपरा के अनुसार निम्न सामग्री चढ़ा सकते हैं।

– कमल अथवा अन्य सुगंधित फूल।
– कमलगट्टा और कौड़ी, जहां पारंपरिक रूप से प्रचलित हों।
– खील और बताशे।
– नारियल और श्रीफल।
– मोतीचूर, बेसन के लड्डू और पेड़ा।
– काजू कतली, बर्फी और अन्य मिठाइयां।
– केला, सेब, अनार और मौसमी फल।
– मखाना, किशमिश और सूखे मेवे।
– पंचामृत, मिश्री और घर में बने सात्विक पकवान।

भोग लगाने के बाद प्रसाद परिवार और आसपास के लोगों में बांटना शुभ माना जाता है।

व्यापारी वर्ग के लिए दीपावली का विशेष महत्व, होगी बही-खाते और तिजोरी की पूजा

दीपावली का पर्व व्यापारियों और व्यवसायियों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन दुकानों, कार्यालयों, प्रतिष्ठानों और व्यावसायिक संस्थानों में मां लक्ष्मी, भगवान गणेश तथा कुबेर की पूजा की जाती है।

व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों की साफ-सफाई कर फूलों, रंगोली और रोशनी से सजावट करते हैं। इसके बाद नई बही-खातों, लेखा पुस्तकों, कलम, दवात, तिजोरी और व्यापार में उपयोग होने वाले महत्वपूर्ण उपकरणों का पूजन किया जाता है।

व्यापारी पूजा में प्रमुख रूप से ये वस्तुएं शामिल होती हैं:

– नई बही-खाता और लेखा पुस्तिका।
– कलम, दवात और लेखन सामग्री।
– तिजोरी और धन रखने का स्थान।
– दुकान के कैश काउंटर और व्यापारिक दस्तावेज।
– तराजू, बाट और अन्य व्यापारिक उपकरण।
– रोली, अक्षत, फूल और माला।
– नारियल, फल, मिठाई, खील और बताशे।
– धूप, दीप और पूजा सामग्री।

कई व्यापारी इस दिन नए बही-खाते की शुरुआत करते हैं, जिसे चोपड़ा पूजन या बही-खाता पूजन कहा जाता है। इसका उद्देश्य नए व्यापारिक वर्ष में ईमानदारी, परिश्रम, उन्नति और आर्थिक समृद्धि की कामना करना है। अलग-अलग व्यापारिक समुदायों में नए लेखे की शुरुआत की तिथियां और परंपराएं भिन्न हो सकती हैं।

दीपावली पर कितने दीपक जलाएं और कहां रखें?

दीपावली का सबसे आकर्षक दृश्य घरों और प्रतिष्ठानों में जलते मिट्टी के दीपक होते हैं। धार्मिक परंपरा में 5, 11, 21, 51 या 101 दीपक जलाने की मान्यता प्रचलित है। हालांकि दीपकों की कोई एक अनिवार्य संख्या निर्धारित नहीं है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दीप प्रज्वलित कर सकते हैं।

घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल, आंगन, तुलसी चौरा, खिड़कियों और बालकनी में दीपक रखे जाते हैं। मिट्टी के दीपक में घी अथवा तेल डालकर बत्ती प्रज्वलित करने की परंपरा है। दीपक का प्रकाश ज्ञान, शुभता और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।

घर को सजाने के लिए करें ये विशेष तैयारियां

दीपावली पर घरों को आकर्षक बनाने के लिए रंगोली, फूलों और विद्युत झालरों का विशेष उपयोग किया जाता है। मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगाएं। प्रवेश द्वार पर रंगोली बनाएं और दोनों ओर दीपक रखें। पूजा स्थल को गेंदे और गुलाब के फूलों से सजाएं।

घर की छत, बालकनी, खिड़कियों और मुख्य द्वार पर आकर्षक लाइटिंग लगाएं। बाजारों और दुकानों में भी रंगीन विद्युत सजावट की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रकाश से सजा घर मां लक्ष्मी के स्वागत और शुभता का प्रतीक है।

दीपावली का धार्मिक और सामाजिक संदेश

दीपावली हमें सिखाती है कि जीवन में सत्य, सदाचार, परिश्रम और सकारात्मक विचारों का महत्व सबसे अधिक है। यह पर्व परिवारों को एकजुट करता है और समाज में प्रेम, भाईचारे तथा सहयोग की भावना को मजबूत बनाता है।

इस अवसर पर जरूरतमंदों की सहायता करना, गरीब परिवारों के साथ मिठाइयां और खुशियां बांटना तथा बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना भी पर्व की सुंदर परंपराओं में शामिल है।

पटाखों के स्थान पर मिट्टी के दीपकों को प्राथमिकता दें। बिजली की झालरों और दीपकों को सुरक्षित तरीके से लगाएं तथा बच्चों को आग और गर्म वस्तुओं से दूर रखें।

आज दीपावली के पावन अवसर पर घर-घर में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना होगी। दीपों की जगमगाहट के बीच हर परिवार यही कामना करेगा कि जीवन में कभी सुख-शांति और खुशहाली की कमी न हो। मां लक्ष्मी की कृपा सभी पर बनी रहे, व्यापार और व्यवसाय में उन्नति हो तथा हर घर में प्रेम, स्वास्थ्य, समृद्धि और खुशियों का उजाला फैले।

आप सभी को दीपावली की हार्दिक बधाई एवं मंगलमय शुभकामनाएं।

शुभ दीपावली! जय मां लक्ष्मी!

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