नदी में 9 गाड़ियां पकड़कर वाहवाही, लेकिन बड़ा सवाल—हर दिन चौक-चौराहों से निकलता अवैध रेत का खेल आखिर किसकी शह पर?
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सीतामढ़ी में कार्रवाई के बाद उठे कई सवाल: पकड़े गए वाहनों के मालिकों के नाम सार्वजनिक क्यों नहीं? कार्रवाई के बाद गाड़ियां छूटती हैं तो कार्रवाई का असर कहां?
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। हसदेव नदी के सीतामढ़ी क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के खिलाफ खनिज विभाग की कार्रवाई में शुक्रवार सुबह 9 वाहन पकड़े गए। कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई को विभाग ने अवैध खनन पर शिकंजा कसने की दिशा में बड़ी कार्रवाई बताया है। लेकिन इस कार्रवाई के बाद अब इससे भी बड़ा सवाल सामने खड़ा हो गया है—जब अवैध रेत से लदे वाहन लगातार शहर और जिले के अलग-अलग चौक-चौराहों से होकर गुजरते हैं, तो वे आखिर निकल कैसे जाते हैं?
शुक्रवार सुबह करीब 5:30 बजे खनिज उड़नदस्ता दल ने सीतामढ़ी क्षेत्र में दबिश दी। मौके पर हसदेव नदी से अवैध रूप से रेत निकालते और उसका परिवहन करते 9 वाहन मिले। कुछ वाहन नदी में फंसे हुए थे, जबकि कुछ को मौके पर ही छोड़कर संबंधित लोग फरार हो गए। नगर पालिक निगम की मदद से नदी में फंसे वाहनों को बाहर निकालकर कोतवाली थाना कोरबा और खनिज जांच चौकी उरगा की अभिरक्षा में रखा गया है।
कार्रवाई यहां तक तो ठीक है, लेकिन अब असली सवाल कार्रवाई के बाद की पारदर्शिता का है। पकड़े गए 9 वाहन आखिर किसके हैं? उनके मालिक कौन हैं? वाहन किसके नाम पंजीकृत हैं? वाहन चालक कौन था? रेत कहां ले जाई जा रही थी? इससे पहले इन वाहनों ने कितनी बार रेत का परिवहन किया? क्या इन वाहनों के खिलाफ पहले भी कार्रवाई हुई है? अगर हुई थी तो उसका क्या परिणाम निकला?
सिर्फ गाड़ियां पकड़ना काफी नहीं, मालिक और पूरे नेटवर्क का खुलासा जरूरी
अवैध रेत परिवहन का खेल केवल नदी में खड़े वाहन तक सीमित नहीं होता। नदी से रेत निकलने के बाद उसे गंतव्य तक पहुंचने के लिए सड़कों और चौक-चौराहों से गुजरना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि अगर अवैध परिवहन लगातार हो रहा है तो निगरानी व्यवस्था कहां है?
लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि यदि अवैध रेत से भरे वाहन नियमित रूप से सड़कों पर दिखाई देते हैं, तो उन पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं होती? क्या विभाग को केवल नदी के भीतर पहुंचकर कार्रवाई करने का इंतजार रहता है? चौक-चौराहों और प्रमुख मार्गों पर निगरानी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति क्या है?
यह सवाल किसी अधिकारी या व्यक्ति पर सीधे आरोप लगाने का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था से जवाब मांगने का है। आखिर अवैध रेत का परिवहन नदी से निकलकर सड़कों तक पहुंचता है, तो उसके रास्ते में जिम्मेदार विभागों की निगरानी कितनी प्रभावी है?
‘9 वाहन जब्त’ की सूचना से आगे बढ़कर सार्वजनिक हो पूरी कार्रवाई
खनिज विभाग ने कहा है कि अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाएगा तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी। ऐसे में अब जनता यह जानना चाहती है कि पकड़े गए 9 वाहनों के विरुद्ध आगे क्या कार्रवाई होती है।
यदि जांच में वाहन मालिक और संबंधित व्यक्ति दोषी पाए जाते हैं तो उनके नाम, वाहन नंबर, प्रकरण और की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि कार्रवाई केवल वाहन जब्ती तक सीमित रही या वास्तव में अवैध रेत कारोबार से जुड़े पूरे नेटवर्क तक पहुंची।
गाड़ी पकड़ी गई, लेकिन आगे क्या? यही है सबसे बड़ा सवाल
अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई का वास्तविक असर तभी दिखाई देगा, जब पकड़े गए वाहनों के मामले में आगे की कार्रवाई भी स्पष्ट हो। यदि कोई वाहन नियम विरुद्ध रेत परिवहन करते पकड़ा जाता है, तो उसकी जब्ती, प्रकरण दर्ज करने, जुर्माना और अन्य वैधानिक कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।
सवाल सीधा है—नदी में गाड़ी पकड़ना कार्रवाई है, लेकिन उसके पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क तक पहुंचना असली कार्रवाई है।
सीतामढ़ी में 9 वाहन पकड़े जाने के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि खनिज विभाग इस मामले में किस-किस के खिलाफ प्रकरण दर्ज करता है, वाहन किसके नाम हैं और आगे क्या कार्रवाई होती है। यदि विभाग अवैध रेत के कारोबार पर वास्तव में लगाम लगाना चाहता है तो केवल नदी में दबिश देने से आगे बढ़कर स्रोत, परिवहनकर्ता, वाहन मालिक और अवैध भंडारण तक पूरी कड़ी को उजागर करना होगा।
क्योंकि सवाल सिर्फ 9 गाड़ियों का नहीं है—सवाल यह है कि जब अवैध रेत का परिवहन लगातार होने की शिकायतें सामने आती हैं, तो आखिर यह खेल कितने समय से चल रहा है और इसकी पूरी कड़ी कब सामने आएगी?







