गणेशोत्सव में पहली बार गूंजेगी श्री गणेश कथा की अमृतवाणी, 10 दिनों तक बरसेगा भक्ति और ज्ञान का रस
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14 से 23 सितंबर तक महानदी काम्प्लेक्स में होगा भव्य आयोजन, पंडित देवशरण दुबे की संगीतमयी वाणी से श्रद्धालु करेंगे श्री गणेश कथा का श्रवण
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। गणेशोत्सव को केवल उत्सव और पूजा तक सीमित न रखते हुए इसे आध्यात्मिक चेतना, संस्कार और जीवन मूल्यों से जोड़ने की अनूठी पहल निहारिका गणेशोत्सव समिति द्वारा की जा रही है। विश्व कल्याण की मंगल भावना को लेकर महानदी काम्प्लेक्स परिसर में 14 सितंबर से 23 सितंबर 2026 तक दस दिवसीय श्री गणेश कथा का भव्य आयोजन किया जाएगा। अंचल में पहली बार आयोजित होने जा रही इस विशेष कथा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह का वातावरण है।
गणेश चतुर्थी से प्रारंभ होने वाली इस कथा में प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक व्यासपीठ से सर्वधर्मार्थ कल्याण सेवा समिति के संस्थापक तथा मानस एवं भागवत के मर्मज्ञ पंडित देवशरण दुबे अपनी संगीतमयी और मधुर वाणी से भगवान श्री गणेश की महिमा का रसपान कराएंगे।
गणेश जन्म से जीवन प्रबंधन तक सुनाए जाएंगे प्रेरणादायी प्रसंग

दस दिवसीय श्री गणेश कथा में भगवान श्री गणेश के जन्म, उनकी महिमा और प्रथम पूज्य बनने की कथा के साथ अनेक धार्मिक एवं प्रेरणादायी प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया जाएगा। कथा में गणेश-परशुराम संवाद, रिद्धि-सिद्धि विवाह, गणेश पुराण के उपदेश तथा भगवान गणेश के जीवन-दर्शन से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कार और जीवन के सकारात्मक पक्षों की प्रेरणा दी जाएगी।
आयोजकों का कहना है कि भगवान श्री गणेश केवल विघ्नहर्ता के रूप में ही पूजनीय नहीं हैं, बल्कि उनका स्वरूप मनुष्य को बुद्धि, विवेक, संयम, धैर्य और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है। यही कारण है कि श्री गणेश कथा का श्रवण केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि अपने जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा प्राप्त करने का अवसर भी है।
कथा श्रवण से मिलती है सकारात्मक जीवन की प्रेरणा
श्री गणेश कथा में भगवान गणेश के चरित्र और उनसे जुड़े प्रसंगों के माध्यम से व्यक्ति को यह संदेश मिलता है कि जीवन में किसी भी परिस्थिति का सामना धैर्य, विवेक और सकारात्मक सोच के साथ किया जा सकता है। कथा श्रवण से मन को आध्यात्मिक शांति मिलती है तथा व्यक्ति को अपने परिवार, समाज और जीवन के प्रति जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से समझने की प्रेरणा प्राप्त होती है।
विशेष रूप से बच्चों और युवाओं के लिए ऐसे धार्मिक एवं संस्कारमय आयोजन महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि कथा के माध्यम से उन्हें माता-पिता का सम्मान, बड़ों का आदर, परिवार के प्रति जिम्मेदारी, सदाचार, संयम और अच्छे संस्कारों की सीख सहज रूप से मिलती है। वहीं परिवार के साथ कथा श्रवण करने से धार्मिक वातावरण के साथ पारिवारिक जुड़ाव भी मजबूत होता है।
गणेशोत्सव को भक्ति के साथ संस्कारों से जोड़ने की पहल
निहारिका गणेशोत्सव समिति ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक कार्यक्रम करना नहीं, बल्कि गणेशोत्सव के माध्यम से समाज में संस्कार, सदाचार, पारिवारिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना का प्रसार करना है। भगवान गणेश की कथा के माध्यम से लोगों को यह समझाने का प्रयास किया जाएगा कि पूजा-अर्चना के साथ उनके आदर्शों और जीवन-दर्शन को अपने आचरण में उतारना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
दस दिनों तक चलने वाली इस कथा के दौरान महानदी काम्प्लेक्स परिसर में श्रद्धा और भक्ति का विशेष वातावरण देखने को मिलेगा। समिति की ओर से अंचल के सभी श्रद्धालुओं, गणेश भक्तों, धर्मावलंबियों एवं नागरिकों से सपरिवार अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर श्री गणेश कथा का श्रवण करने और इस आध्यात्मिक आयोजन का पुण्य लाभ प्राप्त करने की अपील की गई है।
गणेशोत्सव के इस विशेष आयोजन में भक्ति के साथ ज्ञान, संस्कार और जीवन प्रबंधन का संदेश भी मिलेगा। ऐसे में 14 सितंबर से 23 सितंबर तक महानदी काम्प्लेक्स में होने वाली श्री गणेश कथा श्रद्धालुओं के लिए भगवान गणेश की महिमा सुनने के साथ अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा लेने का विशेष अवसर बनेगी।







