September 13, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**  कोरबा। श्री सप्तदेव मंदिर में भादी अमावस्या का पर्व इस बार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भक्ति, नारी शक्ति, संस्कार, सामाजिक एकता और सनातन परंपरा के जीवंत संगम के रूप में सामने आया। 11 सितंबर को मंदिर परिसर में दिनभर चले पूजा-पाठ, जात-पूजन, भजन-कीर्तन, श्री राणी सती दादी का सामूहिक मंगल पाठ और भंडारे ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। सैकड़ों महिलाओं की सहभागिता और दादी जी के जयघोष से मंदिर परिसर देर तक आध्यात्मिक ऊर्जा से गूंजता रहा।
भादी अमावस्या के अवसर पर प्रातःकाल भगवान की विधिवत पूजा-अर्चना और आरती के साथ जात-पूजन संपन्न हुआ। इसके बाद श्री सप्तदेव महिला मंडल ने भजन-कीर्तन की प्रस्तुति दी। भजनों के बीच गूंजते जयकारों ने श्रद्धालुओं को भक्ति के रंग में रंग दिया।
मंगल पाठ में दिखी मातृशक्ति की आस्था
उत्सव का सबसे प्रमुख आकर्षण शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक आयोजित श्री राणी सती दादी चरित्र मानस का भव्य मंगल पाठ रहा। सूरत, गुजरात से प्रसिद्ध मंगल पाठ कलाकार वर्षा सोनी एंड पार्टी विशेष रूप से कोरबा पहुंचीं। उनकी संगीतमय प्रस्तुति के बीच सैकड़ों महिलाओं ने सामूहिक रूप से मंगल पाठ किया।
पारंपरिक वेशभूषा में पहुंची मातृशक्ति, मंगल गीतों की मधुर गूंज और दादी जी के जयकारों ने मंदिर परिसर को ऐसा भक्तिमय स्वरूप दिया कि श्रद्धालु देर तक भाव-विभोर नजर आए। दादी जी के जीवन चरित्र, त्याग, तपस्या, शक्ति और महिमा से जुड़ी प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था से जोड़ने के साथ संस्कार और सेवा का संदेश भी दिया।
पूजा-पाठ की निरंतर परंपरा से क्या मिलता है आध्यात्मिक लाभ?

 

 

श्री सप्तदेव मंदिर में वर्षभर होने वाले पूजा-पाठ, भजन, धार्मिक अनुष्ठान और सामूहिक आयोजनों का महत्व केवल धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं माना जाता। सनातन परंपरा में नियमित पूजा-अर्चना को मन की एकाग्रता, सकारात्मक सोच, आत्मिक शांति और परिवार में सद्भाव बढ़ाने वाली साधना के रूप में देखा जाता है।
मंगल पाठ और सामूहिक प्रार्थना जैसे आयोजन लोगों को कुछ समय के लिए दैनिक तनाव और व्यस्तता से दूर कर आध्यात्मिक वातावरण से जोड़ते हैं। वहीं सामूहिक रूप से पूजा करने से समाज के लोगों के बीच मेल-जोल, सहयोग और सामाजिक एकता मजबूत होती है।
श्रद्धालुओं की आस्था के अनुसार दादी जी की पूजा और मंगल पाठ परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की कामना से जुड़े हैं। हालांकि इनका परिणाम व्यक्तिगत आस्था और धार्मिक विश्वास का विषय है, लेकिन ऐसे आयोजनों से मिलने वाली मानसिक शांति, सामूहिकता और सांस्कृतिक जुड़ाव का महत्व निश्चित रूप से देखा जा सकता है।
34 मंगल पाठ करने वाली महिलाओं-बालिकाओं का सम्मान
श्री सप्तदेव मंदिर ट्रस्ट परिवार ने धार्मिक गतिविधियों में निरंतर सहभागिता को प्रोत्साहित करते हुए वर्षभर सर्वाधिक मंगल पाठ करने वाली 34 महिलाओं एवं बालिकाओं को सम्मानित किया। इनमें 22 प्रथम, 7 द्वितीय और 5 तृतीय पुरस्कार शामिल रहे। सभी चयनित प्रतिभागियों को प्रशस्ति-पत्र भी प्रदान किए गए।
यह पहल विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण रही क्योंकि इससे महिलाओं के साथ नई पीढ़ी की बालिकाओं को भी धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास दिखाई दिया। मंदिर ट्रस्ट का उद्देश्य भक्ति और संस्कार की परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना है।
1000 से अधिक श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
उत्सव के दौरान आयोजित भंडारे में 1000 से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारा धार्मिक आयोजन के साथ सेवा और सामाजिक सहभागिता का भी प्रतीक बना।
कोरबा के विभिन्न समाजों, धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं, महिला मंडलों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी आयोजन में सहभागिता की। सामूहिक उपस्थिति ने उत्सव को सामाजिक एकता और धार्मिक सद्भाव का स्वरूप प्रदान किया।
भादी अमावस्या से पहले कविता ने भी बांधा समां
उत्सव की पूर्व संध्या पर 10 सितंबर को मंदिर परिसर में विराट अखिल भारतीय कवि सम्मेलन भी आयोजित किया गया। देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कवियों ने भक्ति, भगवान अग्रसेन जी महाराज, राष्ट्रभक्ति, वीर रस, बदलते हिंदुस्तान और हास्य-व्यंग्य से जुड़ी रचनाओं से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा।
इस तरह इस वर्ष श्री सप्तदेव मंदिर में भादी अमावस्या का आयोजन धर्म के साथ साहित्य, संस्कृति, सेवा और सामाजिक एकता का अनूठा संगम बन गया।
‘मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, संस्कारों को जोड़ने का केंद्र’—अशोक मोदी
छत्तीसगढ़ प्रांतीय अग्रवाल संगठन, रायपुर एवं कृष्णा ग्रुप के चेयरमैन तथा श्री सप्तदेव मंदिर के प्रमुख ट्रस्टी अशोक मोदी ने आयोजन की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि श्री राणी सती दादी का मंगल पाठ धार्मिक आस्था, नारी शक्ति, संस्कार और सामाजिक एकता का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि मंदिर में होने वाले धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल आयोजन करना नहीं, बल्कि समाज को जोड़ना, नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और संस्कारों से परिचित कराना तथा सनातन परंपराओं को आगे बढ़ाना है। विभिन्न समाजों और संस्थाओं के लोग जब एक साथ धार्मिक आयोजन में सहभागी होते हैं तो सामाजिक सद्भाव और एकता को भी मजबूती मिलती है।
अशोक मोदी ने वर्षा सोनी एवं उनकी पूरी पार्टी, श्री सप्तदेव मंदिर महिला मंडल, ट्रस्ट परिवार, आयोजन से जुड़े सदस्यों, विभिन्न समाजों एवं सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं तथा प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सहयोग देने वाले सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने विशेष रूप से माताओं-बहनों और श्रद्धालुओं को धन्यवाद दिया, जिन्होंने बड़ी संख्या में पहुंचकर मंगल पाठ को भव्यता प्रदान की और परिवार, समाज, नगर एवं देश की सुख-शांति एवं समृद्धि के लिए सामूहिक प्रार्थना की।
‘श्री राणी सती दादी की जय’ के जयघोष के साथ भादी अमावस्या उत्सव का समापन हुआ, लेकिन मंदिर परिसर में गूंजती भक्ति, सामूहिक प्रार्थना और संस्कारों की यह भावना श्रद्धालुओं के मन में लंबे समय तक बनी रही।

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