September 5, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**// कोरबा कम्प्यूटर महाविद्यालय में डॉ. राधाकृष्णन जयंती एवं शिक्षक दिवस की धूम, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कोरबा। कोरबा शिक्षण समिति द्वारा संचालित कोरबा कम्प्यूटर महाविद्यालय में शनिवार को भारत के महान शिक्षाविद एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की 138वीं जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस हर्षोल्लास, गरिमा और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के निर्देशक राजेश अग्रवाल, कोरबा शिक्षण समिति की कोषाध्यक्ष, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय परंपरा के अनुरूप अतिथियों के तिलक एवं बैज लगाकर स्वागत से हुआ। इसके पश्चात पं. हेमंत शर्मा ने मां सरस्वती एवं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के तैलचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की। योगिता ने सरस्वती वंदना एवं गणेश वंदना नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक रंग भर दिया।
नृत्य-संगीत की प्रस्तुतियों ने जीता दिल
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर खूब तालियां बटोरीं। कुमानदनी, स्वीटी, संजना, पूजा, मेघा एवं नेहा सहित विद्यार्थियों ने सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं नंदिनी, जयश्री, श्रेया और काजल तथा प्रीति, अनामिका, ममता एवं श्रुति की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में उत्साह बढ़ाया।
बीसीए एवं बीकॉम प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने दक्षिण भारतीय वेशभूषा में आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। तन्वी के दक्षिण भारतीय एकल नृत्य को भी जमकर सराहना मिली। योगिता एवं प्रतीक की संगीत प्रस्तुति ने कार्यक्रम को और यादगार बना दिया।
PPT के जरिए दिखाया शिक्षकों-विद्यार्थियों का संबंध
बीबीए प्रथम सेमेस्टर के छात्र मनीश ने शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के बीच आपसी सामंजस्य और बेहतर तालमेल को दर्शाते हुए प्रेरणादायी PPT प्रस्तुति दी। प्रस्तुति के माध्यम से बताया गया कि शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षक और विद्यार्थी के बीच विश्वास, अनुशासन और सकारात्मक संवाद भी व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शिक्षकों के लिए हुए रोचक खेल, खूब गूंजी हंसी-ठिठोली
शिक्षक दिवस को यादगार बनाने के लिए विद्यार्थियों ने शिक्षकों के लिए विभिन्न मनोरंजक खेलों का आयोजन किया। इसमें क्विज, आंखों पर पट्टी बांधकर वस्तुओं को स्पर्श से पहचानना, म्यूजिक के माध्यम से दिए गए कंटेंट को एकत्र करना सहित कई गतिविधियां शामिल रहीं। इन खेलों में शिक्षक-शिक्षिकाओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और माहौल में हंसी-खुशी एवं अपनत्व की भावना देखने को मिली।
शिक्षक दीपक की तरह जलकर फैलाता है शिक्षा का उजियारा : अग्रवाल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के निर्देशक राजेश अग्रवाल ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक दीपक की तरह स्वयं जलकर विद्यार्थियों और समाज में शिक्षा का प्रकाश फैलाता है। शिक्षक का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ उन्हें समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी के बीच बेहतर आपसी तालमेल, सम्मान और संवाद होना बेहद जरूरी है। विद्यार्थी को सदैव अपने शिक्षकों के प्रति आदर और विनम्रता का भाव रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब शिक्षक अपने ज्ञान और अनुभव से विद्यार्थियों को सही दिशा देता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है।
निर्देशक अग्रवाल ने विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में संगठन क्षमता, व्यवहार-कुशलता, अनुशासन और समय प्रबंधन जैसे गुण विकसित करते हैं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को शानदार प्रस्तुतियों के लिए बधाई देते हुए भविष्य में भी इसी तरह सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया।
शिक्षकों को स्मृति चिन्ह भेंट कर लिया आशीर्वाद
कार्यक्रम के अंत में छात्र-छात्राओं ने शिक्षक-शिक्षिकाओं को स्मृति चिन्ह एवं अल्पाहार भेंट कर सम्मानित किया। विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस भावपूर्ण क्षण ने गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को और अधिक जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम का सफल मंच संचालन बीसीए पंचम सेमेस्टर की तानिया एवं बीसीए तृतीय सेमेस्टर की नेहा ने किया। आयोजन को सफल बनाने में शिक्षक-शिक्षिकाओं रीना लहरे, बालीदास महंत, सुरभि कुण्डू, सुरभि राठौर, ईरविन कुमार, सिमरन कौर, श्वेता टंडन, आस्था सिंह राजपूत एवं कविता यादव सहित विद्यार्थियों का विशेष योगदान रहा।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। शिक्षक दिवस का यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए गुरु के प्रति सम्मान, अनुशासन और संस्कारों की सीख देने वाला यादगार अवसर बन गया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के सभी नाम

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