गुरुजनों के सम्मान में विद्यार्थियों ने बिछाया प्यार का कारपेट, करतला में यादगार बना शिक्षक दिवस
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पीएम श्री सेजेस करतला में अनूठे अंदाज में हुआ शिक्षकों का सम्मान, बच्चों ने खेल, गीत, नृत्य और हास्य से बांधा समां
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** करतला। शिक्षक और विद्यार्थी के रिश्ते में सम्मान, स्नेह और संस्कार की जो गहराई होती है, उसका खूबसूरत नजारा शिक्षक दिवस के अवसर पर पीएम श्री सेजेस करतला में देखने को मिला। यहां विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों के सम्मान में ऐसा आत्मीय और यादगार कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें स्वागत से लेकर सम्मान तक हर कदम पर बच्चों की श्रद्धा और उत्साह नजर आया।
कार्यक्रम की शुरुआत शिक्षकों के आत्मीय स्वागत से हुई। विद्यार्थियों ने कतारबद्ध होकर करतल ध्वनि के बीच प्राचार्य सहित सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को मंच तक पहुंचाया। विशेष अंदाज में फीता कटवाकर शिक्षकों का प्रवेश कराया गया। इसके बाद क्षेत्रीय परंपरा के अनुरूप अतिथियों एवं गुरुजनों के हाथ धुलवाकर तिलक और बैच लगाकर सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया।

केक काटकर मनाया शिक्षक दिवस, गुरुजनों के साथ बच्चों ने साझा की खुशियां
भारत के महान दार्शनिक, शिक्षाविद एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर प्राचार्य एवं विद्यालय के समस्त स्टाफ ने केक काटकर शिक्षक दिवस का उत्सव मनाया। इस दौरान विद्यालय परिसर में उत्साह और उल्लास का वातावरण बना रहा।
कार्यक्रम को केवल औपचारिक सम्मान तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के लिए मनोरंजक गतिविधियों का भी आयोजन किया। संगीत की धुन पर गुब्बारा पास करने का खेल कराया गया। जैसे ही संगीत बंद होता, जिसके हाथ में गुब्बारा होता उसे चिट निकालनी पड़ती और चिट में लिखी गतिविधि के अनुसार गीत, नृत्य, चुटकुला या अन्य प्रस्तुति देनी होती।
इस खेल ने पूरे कार्यक्रम में जमकर रंग भरा। शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों का मन रखने के लिए पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। किसी शिक्षक ने नृत्य प्रस्तुत किया तो किसी ने गीत सुनाया, वहीं कुछ शिक्षकों ने हास्य-व्यंग्य और चुटकुलों से बच्चों को खूब हंसाया। इसके बाद कुर्सी दौड़ प्रतियोगिता ने भी खूब रोमांच पैदा किया, जिसमें शिक्षक और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
गुरु की महत्ता पर वक्ताओं ने रखे विचार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मनोज तिग्गा, मनोज पाठक, शालिनी हरदहा पटेल एवं नीलिमा पटेल ने गुरु की महत्ता पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाते, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, संस्कार और भविष्य को दिशा देने का कार्य करते हैं।

कार्यक्रम के दौरान थाना प्रभारी श्री गणेश यादव ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को साइबर जागरूकता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों के साथ सेल्फी लेकर कार्यक्रम की खुशियों को यादगार बनाया।
स्टालिन से मुलाकात और बग्घी की कहानी ने खींचा ध्यान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राचार्य दुबराज सिंह राठिया ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन से जुड़े कई रोचक एवं कम चर्चित प्रसंगों को विद्यार्थियों के सामने रखा।
उन्होंने तत्कालीन सोवियत नेता जोसेफ स्टालिन से डॉ. राधाकृष्णन की मुलाकात का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि राधाकृष्णन जी ने सम्राट अशोक और कलिंग युद्ध का उदाहरण देते हुए सत्ता, युद्ध और शांति के बीच के संबंध को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया था।
प्राचार्य ने डॉ. राधाकृष्णन की लोकप्रियता का उल्लेख करते हुए वह प्रसंग भी साझा किया, जब प्रोफेसर के रूप में उनके स्थानांतरण के समय उनके विद्यार्थियों ने उनके प्रति सम्मान प्रकट करते हुए स्वयं बग्घी खींचकर उन्हें रेलवे स्टेशन तक पहुंचाया था। इन प्रसंगों ने विद्यार्थियों को शिक्षक-शिष्य संबंध की गहराई और गुरु के प्रति सम्मान का महत्व समझाया।
नाम छपी कलम और चॉकलेट से हुआ गुरुजनों का सम्मान
कार्यक्रम के अंतिम चरण में विद्यार्थियों ने विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं को नाम अंकित कलम एवं चॉकलेट भेंटकर सम्मानित किया। बच्चों ने गुरुजनों से आशीर्वाद लिया। इस दौरान शिक्षकों के चेहरे पर खुशी और विद्यार्थियों के मन में अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान साफ दिखाई दिया।
शिक्षक दिवस का यह आयोजन महज एक समारोह नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य के आत्मीय रिश्ते, सम्मान और संस्कारों का जीवंत उदाहरण बन गया। विद्यार्थियों द्वारा अपने शिक्षकों के लिए किए गए इस विशेष आयोजन की पूरे विद्यालय में सराहना हुई।
कार्यक्रम का संचालन कक्षा 12वीं की छात्राएं अनिमा अगरिया एवं रागिनी पटेल ने किया। इस अवसर पर विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं अंग्रेजी-हिंदी माध्यम के विद्यार्थी उपस्थित रहे। समारोह उत्साह, उमंग और गुरुजनों के प्रति सम्मान की भावना के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।







