‘सपनों को मिले पहिए’: आमगांव हाईस्कूल की 40 बेटियों को मिली सरस्वती साइकिल योजना की सौगात, शिक्षा की राह हुई आसान
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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। शिक्षा के माध्यम से बेटियों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए शासकीय हाईस्कूल, आमगांव में सरस्वती साइकिल योजना के अंतर्गत 40 छात्राओं को साइकिल वितरित की गई। साइकिल मिलते ही छात्राओं के चेहरों पर खुशी साफ झलकने लगी। यह योजना न केवल विद्यालय तक उनकी नियमित पहुंच सुनिश्चित करेगी, बल्कि उनके सपनों को भी नई उड़ान देगी।

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने छात्राओं को साइकिल प्रदान करते हुए उन्हें मन लगाकर पढ़ाई करने, अपने लक्ष्य निर्धारित करने और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि बेटियों की शिक्षा समाज के विकास की आधारशिला है और सरकार की यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इससे विद्यालय आने-जाने की कठिनाइयाँ कम होंगी और पढ़ाई बीच में छोड़ने की समस्या पर भी प्रभावी रोक लगेगी।
इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष प्रतिनिधि मुकेश जायसवाल, मंडल प्रभारी द्वारिका शर्मा, शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पंकज घुरवा, छोटेलाल पटेल, विधायक प्रतिनिधि श्रीमती अन्नू कंवर, संस्था के प्राचार्य लक्ष्मी कुमार उहरिया सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं शिक्षक उपस्थित रहे।

विद्यालय परिवार की ओर से छात्राओं को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ देते हुए कहा गया कि शिक्षा ही समाज में परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है। जब बेटियाँ शिक्षित होंगी, तभी परिवार, समाज और राष्ट्र मजबूत होगा।
कार्यक्रम में व्याख्याता संतोष कुमार, श्रीमती लक्ष्मी पटेल, सुश्री मंजुषा तिर्की, सुश्री शकुन्तला देशलहरे, सुश्री उमा कुमारी केवर, प्रभात कुमार मिश्रा, कु. नेहा कुर्रे, मानदेय व्याख्याता श्रीमती सीमा राज, कैलाश सिंह सहित विद्यालय परिवार, छात्राएँ एवं अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
साइकिल वितरण के दौरान छात्राओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। उन्होंने इस पहल के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब विद्यालय तक का सफर आसान होगा और वे नियमित रूप से पढ़ाई कर अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी।
यह आयोजन केवल साइकिल वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बेटियों की शिक्षा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को नई गति देने का प्रेरणादायी संदेश भी बन गया।


