क्या राउरकेला पर थम जाएगी दक्षिण बिहार एक्सप्रेस? सावन में लाखों यात्रियों और शिवभक्तों की बढ़ी चिंता



रेलवे के संभावित निर्णय से छत्तीसगढ़ के यात्रियों में बेचैनी, दुर्ग तक परिचालन जारी रखने की उठी जोरदार मांग
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। सावन माह के बीच दक्षिण बिहार एक्सप्रेस को लेकर यात्रियों और श्रद्धालुओं के बीच चिंता बढ़ती जा रही है। जानकारी सामने आई है कि रेलवे द्वारा 31 जुलाई 2026 के बाद दक्षिण बिहार एक्सप्रेस का परिचालन आरा से केवल राउरकेला तक सीमित किए जाने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह निर्णय लागू होता है तो छत्तीसगढ़ के लाखों यात्रियों, श्रद्धालुओं, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारिक वर्ग को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
इसी मुद्दे को लेकर भाजपा सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के पूर्व जिला संयोजक सोनू सतवीर भाटिया ने केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तथा बिलासपुर सांसद तोखन साहू को पत्र लिखकर दक्षिण बिहार एक्सप्रेस का परिचालन पूर्ववत दुर्ग तक जारी रखने की मांग की है।
सबसे बड़ा सवाल – आखिर दुर्ग तक क्यों नहीं?
रेल यात्रियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब वर्षों से दक्षिण बिहार एक्सप्रेस दुर्ग तक संचालित हो रही है और हजारों लोग इस पर निर्भर हैं, तो फिर इसे राउरकेला तक सीमित करने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?
यात्रियों का कहना है कि दुर्ग, भिलाई, रायपुर, तिल्दा, भाटापारा, बिलासपुर, चांपा, कोरबा, सक्ती, रायगढ़, अंबिकापुर और चिरमिरी जैसे क्षेत्रों के लोगों के लिए यह ट्रेन एक महत्वपूर्ण कड़ी है। यदि ट्रेन राउरकेला पर ही समाप्त हो जाती है तो यात्रियों को आगे की यात्रा के लिए दूसरी ट्रेनों पर निर्भर होना पड़ेगा।
सावन में श्रद्धालुओं को होगा सबसे ज्यादा नुकसान
सावन के पवित्र महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा धाम, काशी, देवघर और विभिन्न शिवधामों की यात्रा करते हैं। दक्षिण बिहार एक्सप्रेस इन यात्राओं का प्रमुख साधन मानी जाती है।
यदि ट्रेन का परिचालन राउरकेला तक सीमित हो जाता है तो श्रद्धालुओं को अतिरिक्त यात्रा, ट्रेन बदलने की परेशानी, समय की बर्बादी और आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ सकता है। धार्मिक यात्राओं की योजनाएं भी प्रभावित होने की आशंका है।
कोरबा सहित पूरे छत्तीसगढ़ में उठने लगी आवाज
रेलवे के इस संभावित निर्णय की चर्चा अब कोरबा सहित पूरे छत्तीसगढ़ में होने लगी है। सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और नियमित यात्रियों का मानना है कि दक्षिण बिहार एक्सप्रेस केवल एक ट्रेन नहीं बल्कि लाखों लोगों की जीवनरेखा है।
लोगों का कहना है कि यदि किसी तकनीकी या प्रशासनिक कारण से यह निर्णय लिया जा रहा है तो रेलवे को यात्रियों के हितों को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी चाहिए।
सोनू भाटिया ने उठाया जनभावनाओं का मुद्दा
सोनू सतवीर भाटिया ने अपने पत्र में कहा है कि यह विषय केवल रेल संचालन का नहीं बल्कि जनभावनाओं और श्रद्धालुओं की सुविधा का प्रश्न है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री तोखन साहू से आग्रह किया है कि रेलवे मंत्रालय से चर्चा कर दक्षिण बिहार एक्सप्रेस का संचालन दुर्ग तक जारी रखने के लिए आवश्यक पहल करें।
उन्होंने कहा कि सावन जैसे धार्मिक अवसर पर यात्रियों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी निर्णय से पहले जनता की आवश्यकताओं पर विचार किया जाना चाहिए।
रेलवे प्रशासन के निर्णय पर टिकी लाखों निगाहें
अब पूरे क्षेत्र की निगाहें रेलवे प्रशासन और केंद्र सरकार के निर्णय पर टिकी हुई हैं। यदि दक्षिण बिहार एक्सप्रेस का परिचालन वास्तव में राउरकेला तक सीमित किया जाता है तो इसका व्यापक असर छत्तीसगढ़ के यात्रियों पर पड़ सकता है। वहीं यदि जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए ट्रेन को दुर्ग तक पूर्ववत संचालित रखा जाता है तो लाखों यात्रियों और शिवभक्तों को बड़ी राहत मिलेगी।
जनता पूछ रही है—
“जब ट्रेन से लाखों लोग जुड़े हैं, तो आखिर दक्षिण बिहार एक्सप्रेस को दुर्ग तक चलाने में परेशानी क्या है?”
सावन के इस पावन अवसर पर यह सवाल अब रेलवे प्रशासन के सामने खड़ा है और क्षेत्र के लोग इसके सकारात्मक उत्तर की प्रतीक्षा कर रहे हैं।


