दो साल से भुगतान अटका, ठेकेदारों का फूटा आक्रोश: “काम पूरा कराया, अब मेहनत की कमाई दो”



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//* कोरबा कांट्रेक्टर एसोसिएशन ने अपर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम भेजी मांग; लंबित भुगतान नहीं मिलने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी।
कोरबा। लगभग दो वर्षों से लंबित भुगतानों को लेकर छत्तीसगढ़ के ठेकेदारों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर एसोसिएशन के आह्वान पर गुरुवार को कोरबा कांट्रेक्टर एसोसिएशन के नेतृत्व में जिले के ठेकेदारों ने राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम अपर कलेक्टर देवेंद्र पटेल को ज्ञापन सौंपते हुए जल्द से जल्द लंबित भुगतान जारी करने की मांग की।
एसोसिएशन का कहना है कि ठेकेदारों ने शासन के निर्देशानुसार विकास कार्य समय पर पूरे किए, लेकिन करीब दो वर्षों से भुगतान नहीं मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। कई ठेकेदार भारी कर्ज के बोझ तले दब गए हैं। संगठन का दावा है कि आर्थिक संकट के चलते कुछ ठेकेदारों ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया, जबकि कई लोग मानसिक तनाव, हार्ट अटैक और गंभीर बीमारियों का शिकार हो चुके हैं।

ज्ञापन में कहा गया कि जब विकास कार्य पूरे हो चुके हैं, तब ठेकेदारों को उनकी मेहनत की राशि के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे न केवल ठेकेदार, बल्कि उनसे जुड़े मजदूर, कर्मचारी और उनके परिवार भी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर एसोसिएशन के निर्देश पर प्रदेश के सभी जिलों में एक साथ ज्ञापन सौंपे गए। इसी कड़ी में कोरबा में भी प्रशासन को मांगपत्र सौंपकर लंबित भुगतान शीघ्र जारी करने का आग्रह किया गया। संगठन ने बताया कि प्रदेश के वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री तथा कोरबा विधायक लखन लाल देवांगन से भी मुलाकात का समय लिया गया है। उनके मुख्यालय लौटने पर उन्हें भी ज्ञापन सौंपकर ठेकेदारों की समस्याओं से अवगत कराया जाएगा।
इस अवसर पर जिला कांट्रेक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र तिवारी, सचिव असलम खान, कोषाध्यक्ष संतोष खरे सहित जिले के बड़ी संख्या में ठेकेदार उपस्थित रहे।
ठेकेदारों ने स्पष्ट कहा कि उनकी मांग किसी नई सुविधा की नहीं, बल्कि पूर्ण किए जा चुके कार्यों के वैध भुगतान की है। उन्होंने शासन से शीघ्र निर्णय लेकर लंबित राशि जारी करने की मांग की, ताकि ठेकेदारों को आर्थिक संकट से राहत मिल सके और विकास कार्यों की गति भी प्रभावित न हो।


