जीवनभर शिक्षा की अलख जगाने वाले गुरु को अश्रुपूरित विदाई



प्रधान पाठक रूपनारायण जांगड़े के सम्मान में उमड़ा जनसैलाब, शिक्षा सेवा और अनुशासन की मिसाल को किया नमन
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//* तुमान। वर्षों तक शिक्षा के दीप को प्रज्वलित कर हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने वाले प्राथमिक शाला भाठापारा, तुमान के प्रधान पाठक श्री रूपनारायण जांगड़े के सेवानिवृत्ति अवसर पर विद्यालय परिसर भावनाओं से सराबोर हो उठा। गरिमामय विदाई समारोह में जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और ग्रामीणों ने उनके उल्लेखनीय शैक्षणिक योगदान को याद करते हुए सम्मानपूर्वक विदाई दी। समारोह के दौरान हर किसी की जुबान पर उनके समर्पण, अनुशासन और स्नेहपूर्ण व्यवहार की चर्चा रही।
अपने लंबे शैक्षणिक सेवाकाल में श्री जांगड़े ने केवल पाठ्यक्रम तक ही शिक्षा को सीमित नहीं रखा, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों का भी विकास किया। उनके नेतृत्व में विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का वातावरण विकसित हुआ और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अनेक सकारात्मक पहल की गईं। उनकी कार्यशैली, सरल स्वभाव और विद्यार्थियों के प्रति आत्मीयता ने उन्हें विद्यालय ही नहीं, पूरे क्षेत्र में सम्मानित शिक्षक के रूप में स्थापित किया।
समारोह को संबोधित करते हुए अतिथियों ने कहा कि एक शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता, बल्कि उसका ज्ञान, संस्कार और मार्गदर्शन समाज को निरंतर दिशा देता रहता है। श्री रूपनारायण जांगड़े ने शिक्षा को नौकरी नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम मानकर अपना संपूर्ण जीवन विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए समर्पित किया। उनका व्यक्तित्व और कर्तव्यनिष्ठा नई पीढ़ी के शिक्षकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
इस अवसर पर शाला विकास समिति के अध्यक्ष बलराम वैष्णव, ग्राम पंचायत की सरपंच सुषमा कमलेश कंवर, सीएससी ए.के. निर्मल, प्राचार्य कल्पना शर्मा, रामनारायण जायसवाल, श्री रात्रे, भागवत श्रीवास, गोकुल कंवर, म्याराम चंद्र, संजू वैष्णव, पांडेय मैडम सहित विद्यालय परिवार, श्री जांगड़े के परिजन, ग्राम के गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
समारोह के दौरान अतिथियों ने श्री जांगड़े को शॉल, श्रीफल, पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया तथा उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं सुखमय जीवन की कामना की। विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और भावपूर्ण शब्दों के माध्यम से अपने प्रिय गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त किया। कई विद्यार्थियों और ग्रामीणों की आँखें उस समय नम हो गईं, जब श्री जांगड़े ने अपने सेवाकाल के अनुभव साझा करते हुए सभी का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में पूरे विद्यालय परिवार ने तालियों की गड़गड़ाहट और आत्मीय शुभकामनाओं के साथ श्री रूपनारायण जांगड़े को सम्मानपूर्वक विदाई दी। यह अवसर केवल एक शिक्षक के सेवानिवृत्त होने का नहीं, बल्कि शिक्षा, समर्पण और संस्कार की एक प्रेरणादायी यात्रा को सम्मानपूर्वक नमन करने का यादगार पल बन गया।


