विश्व पर्यावरण दिवस पर गूंजा हरित चेतना का संदेश: ‘पंचामृत वृक्षों’ के संरक्षण का लिया गया संकल्प



पीपल, नीम, तुलसी, वट और आँवला को बताया जीवन, स्वास्थ्य और पर्यावरण का आधार
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// कोरबा, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति संवर्धन को लेकर विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों द्वारा जनजागरण अभियान चलाया गया। इस दौरान लोगों से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने तथा विशेष रूप से पीपल, वट, तुलसी, आँवला और नीम जैसे जीवनदायी वृक्षों के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि अन्न, जल और वायु मानव जीवन के मूल आधार हैं। एक व्यक्ति प्रतिदिन सीमित मात्रा में भोजन और पानी ग्रहण करता है, लेकिन जीवन के लिए सबसे अधिक आवश्यकता शुद्ध वायु की होती है। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की आवश्यकता बन चुका है।
विशेषज्ञों ने बताया कि भारतीय संस्कृति में वर्णित पंचामृत वृक्ष—पीपल, वट, तुलसी, आँवला और नीम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वैज्ञानिक रूप से भी पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं। ये वृक्ष वातावरण को शुद्ध करने, प्रदूषण कम करने, जैव विविधता को संरक्षित रखने और लोगों को स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर पीपल वृक्ष की विशेष महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि यह वातावरण में ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाने और प्रदूषण को कम करने में सहायक माना जाता है। वहीं आँवला को स्वास्थ्यवर्धक तथा ऊर्जा प्रदान करने वाला वृक्ष बताया गया। तुलसी को प्राकृतिक वायु शोधक, नीम को औषधीय गुणों का भंडार तथा वटवृक्ष को पर्यावरण संतुलन बनाए रखने वाला महत्वपूर्ण वृक्ष बताया गया।
वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ता प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और घटते वन क्षेत्र पूरी मानवता के लिए चिंता का विषय हैं। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने का संकल्प लेना चाहिए। केवल पौधारोपण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पौधों को वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना भी हमारी जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे स्वयं वृक्षारोपण करेंगे और अपने परिवार, मित्रों तथा समाज के अन्य लोगों को भी पौधे लगाने के लिए प्रेरित करेंगे। सभी ने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने का आह्वान किया।
वक्ताओं ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण ही मानव जीवन का संरक्षण है। यदि आज वृक्षों और पर्यावरण की रक्षा नहीं की गई तो भविष्य की पीढ़ियों को गंभीर संकटों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने और निभाने का अवसर है।
“एक वृक्ष केवल पौधा नहीं, आने वाली पीढ़ियों के जीवन की सुरक्षा है; पर्यावरण बचाना आज की सबसे बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी है।” 🌳🌱


