अखंड सौभाग्य और अटूट प्रेम का पर्व वट सावित्री व्रत आज, श्रद्धा और भक्ति में डूबीं सुहागिन महिलाएं



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// कोरबा। सनातन संस्कृति और भारतीय परंपरा में सुहागिन महिलाओं के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण व्रतों में शामिल वट सावित्री व्रत आज पूरे जिले में श्रद्धा, आस्था और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। ज्येष्ठ अमावस्या के शुभ अवसर पर महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य, परिवार की सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना करते हुए वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूजा-अर्चना कर रही हैं। सुबह से ही मंदिरों और वट वृक्षों के आसपास महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी है तथा पूजा स्थलों पर भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।
शहर के विभिन्न मंदिरों, कॉलोनियों और धार्मिक स्थलों में महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर विधि-विधान से पूजा की। हाथों में पूजा की थाली, माथे पर सिंदूर और पारंपरिक श्रृंगार में सजी महिलाएं वट वृक्ष के चारों ओर परिक्रमा करते हुए पति की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली की कामना करती नजर आईं।
सावित्री के अटूट प्रेम और तपस्या का प्रतीक है यह व्रत
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार वट सावित्री व्रत का उल्लेख महाभारत, स्कंद पुराण और भविष्य पुराण में मिलता है। मान्यता है कि पतिव्रता सावित्री ने अपने तप, त्याग, दृढ़ संकल्प और अटूट प्रेम के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य, नारी शक्ति और अटूट वैवाहिक प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री अत्यंत तेजस्वी और धर्मपरायण थीं। उन्होंने सत्यवान को अपना पति चुना, जबकि उन्हें पहले से ज्ञात था कि सत्यवान की आयु अल्प है। नियत समय आने पर जब यमराज सत्यवान के प्राण हरने पहुंचे, तब सावित्री अपने पतिव्रत धर्म और भक्ति के बल पर यमराज के पीछे-पीछे चल पड़ीं। उनकी निष्ठा और तपस्या से प्रसन्न होकर यमराज ने सत्यवान को पुनर्जीवन प्रदान किया।
वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास माना जाता है। बरगद का वृक्ष दीर्घायु, स्थिरता और अमरत्व का प्रतीक है। इसकी विशाल शाखाएं और गहरी जड़ें परिवार की मजबूती तथा लंबे वैवाहिक जीवन का संदेश देती हैं। इसी कारण महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं।
सुबह से पूजा-अर्चना और परिक्रमा का दौर
सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही महिलाओं ने स्नान कर नए एवं पारंपरिक वस्त्र धारण किए और पूजा की थाली सजाकर वट वृक्ष के पास पहुंचीं। वहां जल, दूध, रोली, अक्षत, हल्दी, कुमकुम, फूल, दीपक और सुहाग सामग्री अर्पित कर विधिवत पूजा की गई। महिलाओं ने कच्चा सूत या धागा वट वृक्ष के चारों ओर लपेटते हुए सात एवं 108 परिक्रमा कर पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
पूजा में चढ़ाई जा रही विशेष सामग्री
व्रत के दौरान महिलाएं जल, दूध, रोली, अक्षत, लाल-पीले फूल, कच्चा सूत, भीगा चना, मिठाई, मौसमी फल, नारियल, पान-सुपारी, दीपक, धूप, सिंदूर, चूड़ी, बिंदी और अन्य सुहाग सामग्री अर्पित कर रही हैं। कई महिलाएं निर्जला व्रत रखकर पूरे दिन पूजा-अर्चना में लीन हैं।
बाजारों और मंदिरों में दिखी विशेष रौनक
वट सावित्री व्रत को लेकर शहर के बाजारों में सुबह से ही चहल-पहल बनी रही। पूजा सामग्री, फल-फूल और सुहाग सामग्री की दुकानों पर महिलाओं की भारी भीड़ देखने को मिली। मंदिरों और वट वृक्षों के आसपास विशेष साफ-सफाई और पूजा की व्यवस्था की गई है। पूरे शहर में धार्मिक आस्था, श्रद्धा और उत्साह का वातावरण बना हुआ है।


