August 23, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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न्याय और कर्मफल के देवता भगवान शनिदेव की जयंती आज, मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़

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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// कोरबा। ज्येष्ठ अमावस्या के पावन अवसर पर आज भगवान शनिदेव की जयंती जिलेभर में श्रद्धा, भक्ति और आस्था के साथ मनाई जा रही है। सुबह से ही शनि मंदिरों, नवग्रह मंदिरों और पीपल वृक्षों के आसपास श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। भक्तजन विधि-विधान से भगवान शनिदेव की पूजा-अर्चना कर तेलाभिषेक, दान-पुण्य और मंत्र जाप कर सुख-समृद्धि तथा शनि दोष से मुक्ति की कामना कर रहे हैं। मंदिरों में भजन-कीर्तन, सुंदरकांड पाठ और प्रसाद वितरण का आयोजन भी किया जा रहा है, जिससे पूरे शहर में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।
हिंदू धर्म में भगवान शनिदेव को न्याय और कर्मफल का देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि शनिदेव प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। यही कारण है कि लोग शनि जयंती के दिन विशेष रूप से पूजा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से शनिदेव की आराधना करने पर जीवन के दुख, बाधाएं, आर्थिक संकट और शनि दोष का प्रभाव कम होता है।
ज्येष्ठ अमावस्या पर हुआ था भगवान शनिदेव का जन्म
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या के दिन भगवान शनिदेव का जन्म हुआ था। भगवान शनिदेव सूर्यदेव और माता छाया के पुत्र माने जाते हैं। उन्हें न्यायप्रिय और कर्मफलदाता देवता कहा जाता है, जो मनुष्य के अच्छे और बुरे कर्मों का उचित फल प्रदान करते हैं। ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह को अत्यंत प्रभावशाली ग्रह माना गया है, जिसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन, कार्य, संघर्ष और सफलता पर पड़ता है।
सुबह से पूजा-अर्चना और तेलाभिषेक का दौर
आज सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालु स्नान कर काले, नीले अथवा गहरे रंग के वस्त्र धारण कर मंदिरों में पहुंचे। भक्तों ने शनिदेव की प्रतिमा पर सरसों का तेल चढ़ाकर विशेष अभिषेक किया तथा काला तिल, उड़द दाल, नीले फूल, नारियल और दीपक अर्पित किए। पीपल वृक्ष के नीचे दीपदान और जल अर्पित कर भी पूजा की जा रही है।
पूजा के दौरान श्रद्धालु “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप कर रहे हैं। कई स्थानों पर शनि चालीसा, सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ भी किया जा रहा है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान हनुमान की पूजा करने से भी शनि दोष का प्रभाव कम होता है।
दान-पुण्य का विशेष महत्व
शनि जयंती के अवसर पर गरीबों और जरूरतमंदों को दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालु काला तिल, काली उड़द, कंबल, छाता, भोजन, वस्त्र और चप्पल का दान कर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। गौसेवा और पक्षियों को दाना खिलाने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
इन बातों का रखा जा रहा विशेष ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि जयंती के दिन झूठ बोलना, किसी का अपमान करना, क्रोध करना और गलत कार्यों से दूर रहना चाहिए। संयमित व्यवहार, सेवा भावना और जरूरतमंदों की सहायता को इस दिन विशेष पुण्यदायी माना गया है।
मंदिरों में भक्ति और आस्था का माहौल
शहर के विभिन्न शनि मंदिरों में विशेष सजावट की गई है। मंदिरों में सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। कई स्थानों पर भंडारा, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण का आयोजन किया जा रहा है। शनि जयंती को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह, आस्था और भक्ति का माहौल देखने को मिल रहा है।

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