March 17, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

खबरें जरा हट के

बालको में जोगी कांग्रेस का ‘खटिया खड़ी’ आंदोलन फ्लॉप शो: खाली कुर्सियां, किराए की भीड़ और भारी पुलिस बल ने खोली पोल

 

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** कोरबा/बालको। बालको क्षेत्र में जोगी कांग्रेस द्वारा बड़े दावे और जोरदार प्रचार के साथ आयोजित ‘खटिया खड़ी’ आंदोलन पूरी तरह फेल साबित हुआ। जिस आंदोलन को जनआक्रोश का प्रतीक बताया जा रहा था, वह जमीनी हकीकत में महज एक औपचारिक कार्यक्रम बनकर रह गया। कार्यक्रम स्थल पर लगाई गई सैकड़ों कुर्सियां खाली पड़ी रहीं, जबकि मंच से बार-बार भीड़ जुटने के दावे किए जाते रहे।
कार्यक्रम में जोगी कांग्रेस के नेता अमित जोगी ने सभा को संबोधित किया, लेकिन उनकी मौजूदगी भी अपेक्षित जनसमर्थन नहीं जुटा सकी। हालात इतने कमजोर रहे कि कई समय पर आंदोलनकारियों से ज्यादा संख्या में पुलिस और सुरक्षा बल तैनात नजर आए, जिससे पूरे आयोजन की वास्तविकता उजागर हो गई।
खाली कुर्सियों ने बयां की सच्चाई
आंदोलन स्थल पर दूर-दूर तक खाली कुर्सियां नजर आईं। स्थानीय लोगों ने साफ तौर पर कहा कि इस आंदोलन से उनका कोई जुड़ाव महसूस नहीं हुआ। जिन मुद्दों को लेकर आंदोलन किया जा रहा था, वे आम जनता और मजदूरों की प्राथमिकता में शामिल नहीं थे।
‘किराए की भीड़’ के आरोप
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी जोर पकड़ती रही कि कार्यक्रम में जो कुछ लोग नजर आए, उनमें से कई बाहर से लाए गए थे। लोगों का कहना था कि यह आंदोलन वास्तविक जनसमर्थन के बजाय भीड़ जुटाने की औपचारिक कोशिश ज्यादा लग रहा था। “जो आए थे, वे भी स्थानीय नहीं बल्कि किराए पर लाए गए लोग लग रहे थे”—ऐसी चर्चाएं पूरे कार्यक्रम के दौरान सुनने को मिलीं।
संगठनात्मक कमजोरी आई सामने
बालको क्षेत्र में जोगी कांग्रेस का कमजोर संगठनात्मक ढांचा भी इस नाकामी का बड़ा कारण माना जा रहा है। पार्टी अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को बड़ी संख्या में जुटाने में पूरी तरह असफल रही। मजदूर वर्ग, जिनके मुद्दों को केंद्र में रखकर आंदोलन किया गया था, उन्होंने भी इसमें कोई खास रुचि नहीं दिखाई।
राजनीतिक स्टंट बनकर रह गया आंदोलन
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यह आंदोलन वास्तविक समस्याओं के समाधान की बजाय केवल राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास था। यही वजह रही कि आम जनता ने दूरी बनाए रखी और आंदोलन प्रभावहीन साबित हुआ।
पुलिस ज्यादा, प्रदर्शनकारी कम
सुरक्षा के लिहाज से भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, लेकिन हालात यह रहे कि कई बार पुलिसकर्मियों की संख्या ही प्रदर्शनकारियों से ज्यादा दिखाई दी। इससे यह सवाल भी खड़ा हो गया कि जिस आंदोलन को बड़ा जनआंदोलन बताया जा रहा था, उसमें जनता आखिर कहां थी?
कुल मिलाकर, बालको में जोगी कांग्रेस का ‘खटिया खड़ी’ आंदोलन अपने उद्देश्य और प्रभाव दोनों में पूरी तरह विफल नजर आया। बड़े दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर इस आयोजन में साफ तौर पर दिखाई दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.