राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अपमान को लेकर भाजपा का तीखा हमला — ममता बनर्जी से सार्वजनिक माफी की मांग, देशभर में पुतला दहन की चेतावनी



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** रायपुर। पश्चिम बंगाल में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कथित अपमान को लेकर भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विधायक नीलकंठ टेकाम ने कहा कि 7 मार्च को पश्चिम बंगाल में हुई घटना केवल अशिष्ट आचरण नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं का घोर अपमान है। उन्होंने कहा कि भारत की प्रथम नागरिक और देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का जिस प्रकार से अनादर किया गया है, उसने पूरे देश के आदिवासी समाज और मातृशक्ति को आहत किया है।
मंगलवार को रायपुर स्थित एकात्म परिसर के भाजपा कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए विधायक नीलकंठ टेकाम ने कहा कि यह संभवतः देश के इतिहास में पहली बार हुआ है कि जब देश की राष्ट्रपति किसी राज्य के दौरे पर पहुंचीं और वहां की मुख्यमंत्री या कोई वरिष्ठ मंत्री उनके स्वागत के लिए उपस्थित नहीं रहा। उन्होंने इसे केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि राष्ट्रपति पद और संविधान का जानबूझकर किया गया अपमान बताया।
श्री टेकाम ने सवाल उठाते हुए कहा कि पहले से तय सिलीगुड़ी के ‘बिधाननगर’ जैसे सुलभ स्थान को अचानक बदलकर बागडोगरा के ‘गोसाईंनपुर’ जैसे छोटे और दुर्गम स्थान पर कार्यक्रम आयोजित क्यों किया गया। उन्होंने कहा कि यह संदेह पैदा करता है कि कहीं ममता सरकार इस बात से भयभीत तो नहीं थी कि राष्ट्रपति को सुनने के लिए आदिवासी समाज का विशाल जनसमूह उमड़ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि स्वयं राष्ट्रपति को भी मंच से यह कहना पड़ा कि यदि कार्यक्रम स्थल बड़ा होता तो अधिक आदिवासी लोग शामिल हो सकते थे।
भाजपा विधायक ने कहा कि भारत के इतिहास में पहली बार एक आदिवासी महिला देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन हुई हैं। इसके बावजूद उनका स्वागत न करना ममता बनर्जी की संकीर्ण मानसिकता और आदिवासी विरोधी सोच को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का पद दलगत राजनीति से ऊपर होता है, लेकिन पश्चिम बंगाल की सरकार ने इसे भी अपनी तुच्छ राजनीति का माध्यम बना दिया है।
श्री टेकाम ने कहा कि ममता बनर्जी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, पूरे आदिवासी समाज और देश की मातृशक्ति से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो देश का जागरूक आदिवासी समाज लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगा।
उन्होंने आगे कहा कि हाल के वर्षों में कांग्रेस और इंडी गठबंधन के नेताओं द्वारा देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद को लेकर अमर्यादित टिप्पणियां करना एक पैटर्न बन गया है। उन्होंने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी द्वारा राष्ट्रपति के लिए ‘राष्ट्रपत्नी’ शब्द का प्रयोग करने का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल जुबान फिसलने का मामला नहीं था, बल्कि इसके पीछे गहरी मानसिकता झलकती है। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के प्रति भी कांग्रेस नेताओं ने कई बार अपमानजनक टिप्पणियां की थीं।
विधायक टेकाम ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को यह समझना होगा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि करोड़ों आदिवासियों और महिलाओं की प्रेरणा हैं। उनका अपमान देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने जैसा है।
11 मार्च तक देशभर में होगा पुतला दहन : विकास मरकाम
पत्रकार वार्ता की शुरुआत में आदिवासी स्वास्थ्य परम्पराएँ एवं औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने भी पश्चिम बंगाल सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के कार्यक्रम में हुई अव्यवस्था और प्रोटोकॉल के उल्लंघन के पीछे तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक साजिश प्रतीत होती है।
श्री मरकाम ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र, आदिवासी समाज और देश की महिलाओं का अपमान है। इस घटना से देशभर के आदिवासी समाज में गहरा आक्रोश है।
उन्होंने बताया कि इस अपमान के विरोध में भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के तत्वावधान में 11 मार्च तक देशभर के सभी जिलों में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का पुतला दहन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश का आदिवासी समाज अपने सम्मान और संविधान की गरिमा की रक्षा के लिए एकजुट है और इस मुद्दे पर व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।


