August 14, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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1104 क्विंटल धान का महीनों से नहीं हुआ उठाव, कुदमुरा उपार्जन केंद्र में जंगली हाथी का हमला; फड़ प्रभारी राजेश सिंह की मौत के बाद हरकत में आया प्रशासन

 

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//**  कोरबा। जिले के कुदमुरा धान उपार्जन केंद्र में होली की रात हुई दर्दनाक घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। केंद्र में लंबे समय से पड़े 1104 क्विंटल धान का उठाव नहीं होने के कारण एक जंगली हाथी धान की गंध से आकर्षित होकर परिसर में पहुंच गया और इसी दौरान हुए हमले में फड़ प्रभारी राजेश सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद अब प्रशासन और संबंधित विभाग हरकत में आए हैं और बताया जा रहा है कि आज धान के उठाव की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
जानकारी के अनुसार कुदमुरा धान उपार्जन केंद्र में बड़ी मात्रा में धान कई दिनों से खुले में रखा हुआ था। समय पर उठाव नहीं होने के कारण धान की सुरक्षा की जिम्मेदारी फड़ प्रभारी राजेश सिंह के कंधों पर थी। होली की रात अचानक एक जंगली हाथी बाउंड्री परिसर में घुस आया और वहां रखे धान को खाने लगा।

 

 

बताया जा रहा है कि जब राजेश सिंह ने हाथी को भगाने की कोशिश की तो हाथी उग्र हो गया और उसने उन्हें दौड़ाकर बुरी तरह कुचल दिया। गंभीर हमले के कारण राजेश सिंह की मौके पर ही मौत हो गई।
इस दर्दनाक घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब धान खरीदी का कार्य काफी पहले पूरा हो चुका था, तो आखिर 1104 क्विंटल धान का उठाव अब तक क्यों नहीं किया गया? यदि समय पर धान का उठाव हो जाता तो संभवतः यह दुखद घटना नहीं होती।
घटना के बाद ग्रामीणों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही और धान उठाव में देरी के कारण एक व्यक्ति की जान चली गई। अब जब यह हादसा हो गया है, तब संबंधित विभाग सक्रिय दिखाई दे रहे हैं और धान के उठाव की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही जा रही है।
घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है। वहीं स्थानीय लोग मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा देने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
कुदमुरा की यह घटना केवल एक हादसा नहीं बल्कि प्रशासनिक उदासीनता पर बड़ा सवाल है। अब देखना यह होगा कि इस घटना के बाद जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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