‘आकांक्षी से ओलंपिक तक’: बस्तर की बदलती तस्वीर पर संसद में प्रधानमंत्री का बड़ा संदेश






मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले— नीति, नीयत और नेतृत्व ने बस्तर को भय से निकालकर विकास की राह पर लाया
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//**रायपुर,5 फरवरी 2026
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज संसद में अपने उद्बोधन के दौरान छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि जो बस्तर कभी ‘आकांक्षी जिला’ के रूप में जाना जाता था, आज वही बस्तर पूरे देश में “बस्तर ओलंपिक” के नाम से पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि आज विकास की धारा बस्तर के सुदूर गांवों तक पहुंच रही है। कई गांवों में पहली बार बस सेवा शुरू हुई, जिसे ग्रामीणों ने उत्सव की तरह मनाया। यह बदलाव बताता है कि सरकार की नीतियां अब अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय ऐसा था जब कुछ क्षेत्रों को पिछड़ा मानकर उपेक्षित कर दिया गया। वहां रहने वाले करोड़ों नागरिकों की बुनियादी जरूरतों तक को नज़रअंदाज़ किया गया। विकास के अभाव में हालात बद से बदतर होते चले गए और इन इलाकों को ‘पनिशमेंट पोस्टिंग’ के लिए उपयुक्त मान लिया गया, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था और कमजोर हुई।
उन्होंने बताया कि इस सोच को बदलते हुए निर्णय लिया गया कि पिछड़े क्षेत्रों में योग्य, युवा और सक्षम अधिकारियों को तैनात किया जाएगा और उन्हें तीन वर्षों का पर्याप्त समय देकर स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अवसर दिया जाएगा। एक के बाद एक ठोस फैसलों के परिणाम आज पूरे देश के सामने हैं।
प्रधानमंत्री के वक्तव्य पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर छत्तीसगढ़ का सौभाग्य है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह क्षेत्र धरती का स्वर्ग कहा जा सकता है। यहां कुटुमसर जैसी विश्वविख्यात गुफा, विशाल अबूझमाड़ का वन क्षेत्र, मनमोहक जलप्रपात और धुड़मारास जैसे गांव हैं, जिसे विश्व पर्यटन संस्था द्वारा विश्व के 20 सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्रामों में चयनित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग चार दशकों तक नक्सलवाद के कारण बस्तर विकास से वंचित रहा, जबकि बस्तर का क्षेत्रफल केरल जैसे राज्य से भी बड़ा है। अब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प, स्पष्ट नीति और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से बस्तर में नक्सलवाद समाप्ति की ओर है और विकास ने नई गति पकड़ी है।
उन्होंने बताया कि इसी बदले हुए माहौल और विश्वास का परिणाम है कि बस्तर ओलंपिक का आयोजन पिछले वर्ष से प्रारंभ हुआ। पिछले वर्ष इसमें 1 करोड़ 65 लाख युवाओं ने भाग लिया था, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 3 करोड़ 91 लाख तक पहुंच गई है। इसी प्रकार बस्तर पंडुम का आयोजन भी सांस्कृतिक चेतना और जनभागीदारी का मजबूत मंच बनकर उभरा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने जानकारी दी कि संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम का शुभारंभ 7 फरवरी को महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के करकमलों से होगा, जबकि समापन 9 फरवरी को केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मुख्य आतिथ्य में संपन्न होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कई बार बस्तर और बस्तर ओलंपिक का उल्लेख किया जाना पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर अंचल के लिए गौरव का विषय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बस्तर भय और पिछड़ेपन की पहचान से बाहर निकलकर विश्वास, विकास और संभावनाओं का प्रतीक बन रहा है। यह परिवर्तन इस बात का सशक्त प्रमाण है कि यदि नीति सही हो, नीयत साफ हो और नेतृत्व दृढ़ हो, तो दशकों की उपेक्षा को भी बदला जा सकता है।





