केंद्रीय बजट 2026 से स्वास्थ्य क्रांति की शुरुआत, ‘बीमारी का इलाज नहीं—स्वस्थ भारत की गारंटी’






जन-जन तक इलाज, आदिवासी अंचलों तक विशेषज्ञ सेवाएँ—यह बजट है आम आदमी की ढाल
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ***//** रायपुर केंद्रीय बजट 2026 को लेकर भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता ने इसे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में ऐतिहासिक मोड़ करार दिया है। उनका कहना है कि यह बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि बीमारी, असुरक्षा और उपेक्षा के खिलाफ सरकार का सीधा प्रहार है। यह बजट साफ संदेश देता है कि अब शासन की प्राथमिकता इलाज तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हर नागरिक को स्वस्थ, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की गारंटी दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार ने स्वास्थ्य को महज अस्पतालों की दीवारों में कैद न रखकर एक मजबूत सार्वजनिक प्रणाली के रूप में खड़ा करने का संकल्प लिया है। जिला अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने और टेली-मेडिसिन के विस्तार से दूरस्थ ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों तक विशेषज्ञ डॉक्टरों की पहुँच सुनिश्चित होगी। अब गंभीर मरीजों को शहरों की ओर धक्के खाने की मजबूरी खत्म होगी। यह सामाजिक न्याय पर आधारित स्वास्थ्य नीति है, जिसमें अंतिम पंक्ति में खड़ा नागरिक भी बराबरी का हकदार होगा।
उन्होंने दो टूक कहा कि स्वस्थ समाज की नींव पोषण से ही पड़ती है। बजट में मोटे अनाज (मिलेट्स) और स्थानीय खाद्य प्रणाली को बढ़ावा देना यह साबित करता है कि सरकार दिखावटी योजनाओं पर नहीं, बल्कि जमीनी जरूरतों के स्थायी समाधान पर काम कर रही है। आंगनबाड़ी सेवाओं को सशक्त बनाकर भविष्य की पीढ़ी को कुपोषण से बचाने का निर्णायक अभियान छेड़ा गया है। यह बजट स्वस्थ शरीर, संतुलित मन और सुरक्षित जीवन की ठोस नींव रखता है।
स्वास्थ्य क्षेत्र को अब केवल सेवा का माध्यम नहीं, बल्कि रोजगार सृजन का मजबूत इंजन बनाया जा रहा है। नर्सिंग, पैरामेडिकल, सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता, पोषण कार्यकर्ता और केयर सेवाओं से जुड़े कौशल विकास से ग्रामीण भारत के युवाओं और महिलाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। यह बजट इलाज के साथ-साथ रोजगार और आत्मनिर्भरता की भी गारंटी देता है।
महिला स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर बजट का रुख सीधा और निर्णायक बताया गया। अब महिला स्वास्थ्य को केवल मातृत्व तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि पूरे जीवन-चक्र के नजरिए से योजनाएँ बनाई गई हैं। कैंसर स्क्रीनिंग, एनीमिया से मुक्ति अभियान और कार्यस्थल पर स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे प्रावधान महिलाओं को वास्तविक अर्थों में आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाएंगे। प्रत्येक जिला अस्पताल में ट्रॉमा यूनिट की व्यवस्था का प्रावधान आपात स्थितियों में जान बचाने की गारंटी के रूप में देखा जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों और असंगठित क्षेत्र की महिलाओं के लिए सामाजिक सुरक्षा का विस्तार नीति नहीं, नीयत का प्रमाण है।
मानसिक स्वास्थ्य को मुख्यधारा में लाने को समय की सबसे बड़ी जरूरत पर सीधा प्रहार बताया गया। बदलती जीवनशैली और बढ़ते दबावों के बीच काउंसलिंग सुविधाओं का विस्तार युवाओं और कामकाजी वर्ग के लिए संजीवनी साबित होगा। अब मानसिक स्वास्थ्य हाशिये का विषय नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय प्राथमिकता बनेगा।
बजट में अंत्योदय के संकल्प को मजबूती से आगे बढ़ाते हुए वृद्धजन, दिव्यांगजन और छोटे किसानों के लिए स्वास्थ्य बीमा व पेंशन योजनाओं के विस्तार का प्रावधान किया गया है। संदेश साफ है—संकट की घड़ी में देश का अंतिम व्यक्ति अकेला नहीं रहेगा।
कुल मिलाकर केंद्रीय बजट 2026 बीमारी, असमानता और उपेक्षा के खिलाफ सरकार की आक्रामक नीति का ऐलान है। यह बजट सिर्फ वादों का पुलिंदा नहीं, बल्कि ‘स्वस्थ नागरिक—सशक्त राष्ट्र’ की दिशा में निर्णायक प्रहार है।





