श्री सप्तदेव मंदिर में बसंत पंचमी पर आस्था का महासंगम माँ सरस्वती पूजन के साथ मंदिर का 32वां वार्षिकोत्सव एवं श्री श्याम जी का 18वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास से सम्पन्न






त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//कोरबा 23 जनवरी 2026
श्री सप्तदेव मंदिर में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी बसंत पंचमी के पावन अवसर पर माँ सरस्वती पूजन, मंदिर का 32वां वार्षिकोत्सव तथा श्री खाटू श्याम जी का 18वां स्थापना दिवस अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साहपूर्ण वातावरण में धूमधाम से मनाया गया। शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को आयोजित इस भव्य धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
उल्लेखनीय है कि दिनांक 15 फरवरी 1994 को बसंत पंचमी के शुभ दिन ही श्री सप्तदेव मंदिर में देवी-देवताओं की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई थी। वहीं, बसंत पंचमी वर्ष 2007 को मंदिर परिसर में श्री खाटू श्याम जी, चारों धाम एवं द्वादश ज्योतिर्लिंगों की स्थापना की गई थी, जिससे यह मंदिर क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया।
बसंत पंचमी के इस पावन दिन प्रातः दोपहर 12.00 बजे माँ सरस्वती की विशेष आरती, वंदना एवं विधिवत पूजन संपन्न हुआ। चूंकि इसी दिन 33 वर्ष पूर्व मंदिर में देवताओं की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी, अतः इस अवसर पर श्री राणी सती मंदिर का 32वां वार्षिकोत्सव एवं श्री खाटू श्याम जी का 18वां वार्षिकोत्सव भी पूरे श्रद्धा भाव के साथ मनाया गया। मंदिर परिसर भजन-कीर्तन, मंत्रोच्चार एवं जयकारों से भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा।
पूजन-अर्चना के उपरांत भगवान को भोग अर्पित किया गया तथा दोपहर 1.00 बजे से 3.00 बजे तक खिचड़ी प्रसाद का विशाल वितरण किया गया, जिसे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक ग्रहण किया। आयोजन के दौरान अनुशासन, स्वच्छता एवं श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया।
इस गरिमामय आयोजन में मंदिर के प्रमुख ट्रस्टी श्री अशोक मोदी, प्रमुख पुजारी श्री नवीन महाराज, सोमदत्त महाराज, श्री बी.एम. शर्मा के साथ-साथ आशीष सिंह, जनकराम साहू, ज्योति यादव, शीतल कौर सहित अनेक श्रद्धालु, सेवादार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए इसे आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
बसंत पंचमी के इस पावन अवसर पर श्री सप्तदेव मंदिर एक बार फिर श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक समरसता का सशक्त केंद्र बनकर उभरा, जहाँ धर्म और सेवा का अनुपम संगम देखने को मिला।





