प्रगति नगर में सालों से जमे अवैध कब्जों पर एसईसीएल का आर्थिक प्रहार, खाली कराने के बजाय भारी किराया वसूली से मचा हड़कंप






त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** दीपिका एसईसीएल दीपका प्रबंधन ने आखिरकार प्रगति नगर आवासीय परिसर में वर्षों से जड़ जमाकर बैठे गैर-अधिकृत कब्जाधारियों के खिलाफ सख्ती का बिगुल फूंक दिया है। अब तक बेदखल किए जाने की कार्रवाई न होने से निश्चिंत होकर रह रहे अवैध कब्जाधारियों को प्रबंधन ने सीधे भारी-भरकम किराया जमा करने का नोटिस थमाकर बड़ा झटका दिया है। इस अचानक लिए गए फैसले से पूरे प्रगति नगर क्षेत्र में अफरा-तफरी और हड़कंप की स्थिति बन गई है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार प्रगति नगर के आवासीय क्वार्टरों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग रह रहे हैं, जो या तो एसईसीएल के कर्मचारी ही नहीं हैं अथवा जिनकी वैध आवंटन अवधि कई वर्ष पूर्व ही समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद ये लोग कथित प्रभाव, पहुंच और अंदरूनी संरक्षण के बल पर लंबे समय से सरकारी आवासों पर कब्जा जमाए हुए थे। अब एसईसीएल प्रबंधन ने ऐसे सभी लोगों को अवैध कब्जाधारी घोषित करते हुए किराया वसूली का नोटिस जारी किया है।
सूत्र बताते हैं कि नोटिस में दर्शाई गई किराया राशि सामान्य बाजार दर से कई गुना अधिक है। यही वजह है कि वर्षों से बिना किसी डर के रह रहे अवैध कब्जाधारियों में अचानक खलबली मच गई है और कई लोगों के “होश उड़ गए” हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक यह पहला मौका है जब प्रबंधन ने सीधे आर्थिक दबाव बनाकर कब्जाधारियों को घेरने की रणनीति अपनाई है।
हालांकि इस कार्रवाई को लेकर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कब्जा अवैध है तो फिर सीधे मकान खाली कराने की प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई जा रही। जानकारों का मानना है कि भारी किराया वसूली का यह कदम कब्जाधारियों को स्वयं ही क्वार्टर छोड़ने के लिए मजबूर करने की एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है।
यह भी गौरतलब है कि इससे पहले भी प्रगति नगर में अवैध कब्जों को लेकर कई बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन कुछ समय बाद कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली जाती रही। इसी वजह से अब भी लोगों में संशय बना हुआ है कि यह सख्ती केवल कागजी साबित होगी या फिर वास्तव में जमीन पर असर दिखेगा।
फिलहाल, प्रबंधन के बदले हुए तेवर और नोटिस में लिखी गई भारी-भरकम राशि को देखकर यह संकेत मिल रहे हैं कि प्रगति नगर में वर्षों से चले आ रहे अवैध कब्जों के दिन अब पूरे होने वाले हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि एसईसीएल प्रबंधन इस बार केवल चेतावनी तक सीमित रहता है या फिर वास्तविक और निर्णायक कार्रवाई भी करता है।





