“16 साल में ढह गया विकास का दावा: देवरी पुल बना मौत का रास्ता, दर्जनों पंचायतों की ज़िंदगी दांव पर”






जटिल समस्या 🥽 | प्रशासनिक लापरवाही का खतरनाक और शर्मनाक उदाहरण
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** कोरबा/कटघोरा। विकासखंड कटघोरा के अंतर्गत ग्राम देवरी में स्थित मुख्य पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद हालात लगातार बद से बदतर होते जा रहे हैं। बड़ा पुल टूटने के बाद उसके नीचे बने पुराने और पहले से जर्जर पुल को जैसे-तैसे मरम्मत कर आवागमन चालू रखा गया है, जो किसी भी समय भीषण दुर्घटना में तब्दील हो सकता है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक संवेदनहीनता को उजागर करती है, बल्कि आम नागरिकों की जान के साथ खुला खिलवाड़ भी है।

सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि हालात की गंभीरता सभी के सामने होने के बावजूद क्षतिग्रस्त पुल के स्थायी पुनर्निर्माण को लेकर अब तक कोई ठोस, निर्णायक और जिम्मेदार पहल नहीं की गई। इस पुल के टूटने से दर्जनों पंचायतों के हजारों ग्रामीणों का दैनिक जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है।
रोज़मर्रा की ज़िंदगी ठप, ग्रामीण जान जोखिम में डालने को मजबूर
पुल टूटने का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है।
विद्यार्थी जान जोखिम में डालकर स्कूल आने-जाने को मजबूर हैं
मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचना कठिन हो गया है
बड़ी गाड़ियों का आवागमन बंद होने से व्यापार, आपूर्ति और आपात सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं
स्थिति इतनी गंभीर है कि शासन की महत्वपूर्ण धान खरीदी योजना भी इस पुल की बदहाली की भेंट चढ़ चुकी है। पुल टूटने के कारण किसानों को अरदा–ढेलवाडीह–सिंघाली मार्ग से होकर जवाली समिति तक जाना पड़ रहा है, जिससे उन्हें—
➡️ दोगुना समय,
➡️ अतिरिक्त ईंधन खर्च,
➡️ और भारी मानसिक व आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि यदि यही हालात रहे तो उनकी मेहनत और मुनाफा दोनों ही सड़क पर आ जाएंगे।
घटिया निर्माण की खुली पोल, 16 साल भी नहीं टिक पाया पुल
सन 2008 में निर्मित यह बड़ा पुल 16 साल भी नहीं टिक पाया, जो घटिया गुणवत्ता, लापरवाह निगरानी और संदिग्ध निर्माण प्रक्रिया का जीवंत उदाहरण है।
उस समय जनपद सदस्य रहे बुंदेली कसई पाली के रूप सिंह बिंध्यराज ने निर्माण में अनियमितताओं की शिकायत कलेक्टर तक की थी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
आज उसी अनदेखी और उदासीनता का खामियाजा निर्दोष ग्रामीण जनता भुगत रही है।
अस्थायी मरम्मत, स्थायी खतरा बना पुल
भारी बारिश के दौरान बड़ा पुल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। नीचे बना पुराना छोटा पुल पहले से ही कमजोर अवस्था में था, जिसे मजबूरी में आसपास की तीन पंचायतों के सरपंच—
शिवलाल, ललितेश प्रताप सिंह और उमा देवी रामकुमार गौंटिया—द्वारा अस्थायी रूप से ठीक कराकर पैदल, दोपहिया और छोटे वाहनों के लिए चालू कराया गया।
ग्रामीणों का साफ कहना है कि यह व्यवस्था—
❌ न सुरक्षित है,
❌ न भरोसेमंद,
और हर गुजरता दिन एक बड़े हादसे की आशंका को और गहरा कर रहा है।
प्रशासन की चुप्पी पर गुस्सा, जनता में बढ़ता आक्रोश
ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते जांच, जिम्मेदारी तय करने और सुधारात्मक कार्रवाई की गई होती, तो आज यह भयावह स्थिति पैदा नहीं होती।
आज हालात यह हैं कि लोग जान हथेली पर रखकर आवागमन कर रहे हैं, जबकि जिम्मेदार महकमे खामोशी ओढ़े बैठे हैं।
इस मुद्दे को कई बार मीडिया के माध्यम से उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस, ज़मीनी और प्रभावी पहल नहीं दिखी। इससे क्षेत्रवासियों में गहरा आक्रोश और निराशा व्याप्त है।
ग्रामीणों की दो टूक चेतावनी और मांग
ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में मांग की है कि—
✔️ देवरी पुल का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए
✔️ घटिया निर्माण और लापरवाही के जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय की जाए
✔️ स्थायी, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण नए पुल का शीघ्र निर्माण शुरू किया जाए
ग्रामीणों का कहना है कि यदि अब भी केवल आश्वासन दिए गए और काम नहीं हुआ, तो वे आंदोलन और व्यापक विरोध के लिए मजबूर होंगे।
अब सवाल यह है कि कोई बड़ी जनहानि होने से पहले प्रशासन जागेगा या फिर किसी हादसे का इंतजार किया जाएगा?





