बरपाली में भव्यता और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ विश्वकर्मा पूजन एवं विसर्जन यात्रा


बरपाली (करतला), 19 सितंबर 2025।
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ भगवान विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर करतला जनपद उपाध्यक्ष श्री मनोज झा के वर्कशॉप, बरपाली में विश्वकर्मा पूजन का आयोजन बड़े हर्षोल्लास और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर भगवान विश्वकर्मा की भव्य प्रतिमा की स्थापना कर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना की गई।
पूजन में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता, श्रद्धालु और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। दीप-प्रज्वलन, भजन-कीर्तन और आरती के साथ क्षेत्र की समृद्धि और सुख-शांति की कामना की गई। आयोजन स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। पूजा-अर्चना के उपरांत प्रसाद वितरण किया गया और सामूहिक भोज का आयोजन भी हुआ, जिससे पूरे दिन बरपाली में उत्सव जैसा माहौल रहा।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
पूजन के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से उपस्थित जनों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूर्व विधायक, जिला पंचायत सदस्य, जनपद अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष, पंचायत प्रतिनिधि, सरपंच, सचिव एवं अधिकारी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण इस आयोजन का हिस्सा बने।
भव्यता के साथ निकली विसर्जन यात्रा
पूजन उपरांत बरपाली में विश्वकर्मा बाबा की विसर्जन यात्रा निकाली गई। हाइड्रा गाड़ी पर आकर्षक ढंग से सजाई गई भगवान विश्वकर्मा की झांकी इस यात्रा का मुख्य आकर्षण रही। यात्रा के दौरान युवा कर्मा की धुनों पर झूमते नजर आए, वहीं महिलाओं और बच्चों ने भक्ति गीतों और जयकारों से पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
करीब 500 से अधिक श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल हुए। जगह-जगह श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा और जलपान से स्वागत किया गया। पूरी यात्रा गाजे-बाजे, जयकारों और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुई।
शांति और अनुशासन की मिसाल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जनपद उपाध्यक्ष श्री मनोज झा ने कहा कि बिना डीजे, बिना नशा और बिना ध्वनि प्रदूषण के भी धार्मिक और सामाजिक आयोजन सफलतापूर्वक किए जा सकते हैं। उन्होंने झा वर्कशॉप के स्टाफ और ग्रामीणों की सराहना करते हुए कहा कि यह यात्रा शांति, अनुशासन और

आस्था का उदाहरण बनी है।
श्री झा ने कहा कि त्योहारों का असली उद्देश्य आपसी भाईचारा, सामाजिक एकजुटता और सद्भावना है। उन्होंने सभी ग्रामीणों से अपील की कि आने वाले पर्व भी स्वच्छ, नशामुक्त और पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखते हुए मनाए जाएँ ताकि समाज में सकारात्मक वातावरण निर्मित हो और आने वाली पीढ़ियाँ भी अच्छे मूल्यों को आत्मसात कर सकें।

