पितृ पक्ष में पितरों के प्रति अटूट श्रद्धा का अनुष्ठान – मध्यान्ह काल में तर्पण और भोजन कराएं, पितृ प्रसन्नता का लाभ पाएं


त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ पितृ पक्ष भारतीय संस्कृति में अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समय माना जाता है। यह पावन अवसर हमें अपने पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनकी आत्मा की शांति हेतु तर्पण और भोजन अर्पित करने का अवसर प्रदान करता है।
आस्था के अनुसार, पितृ पक्ष में पितरों के तर्पण और भोजन का सबसे शुभ समय दोपहर 1:34 बजे से 4:04 बजे तक का माना गया है। फिर भी, सबसे उत्तम और पुण्यकारी समय मध्यान्ह काल, अर्थात दोपहर 12:00 बजे के आसपास का होता है। इसे ‘कुतुप वेला’ भी कहा जाता है, जो सुबह 11:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक का पवित्र समय माना जाता है। इस समय में तर्पण और भोजन अर्पित करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
पावन परंपरा के अनुसार, सबसे पहले पितरों को ध्यानपूर्वक भोजन अर्पित करें। यह माना जाता है कि इस प्रकार अर्पित भोजन सीधे पितरों तक पहुँचता है और उनकी आत्मा को सन्तोष एवं शांति प्राप्त होती है। इसके पश्चात ब्राह्मणों को भोजन कराना आवश्यक होता है, जिससे यह अनुष्ठान पूर्ण होता है। ब्राह्मणों के माध्यम से की गई सेवा से पितरों की प्रसन्नता सुनिश्चित होती है।
विशेष ध्यान देने योग्य बात यह है कि तर्पण के बाद ब्राह्मण अथवा गरीब व्यक्ति को भोजन का दान अवश्य करें। यदि भोजन कराना संभव न हो तो चावल, आटा, दाल, सब्जी जैसी आवश्यक खाद्य सामग्री दान करना पुण्य का कार्य माना गया है।
पितृ पक्ष के दौरान तामसिक पदार्थों से परहेज करना अति आवश्यक है। उड़द, चना, मसूर, जीरा, काला नमक आदि का उपयोग वर्जित है, क्योंकि यह धार्मिक दृष्टि से अशुद्ध माना जाता है।
यह पर्व हमें अपने पूर्वजों की दी गई सीखों को याद करने, उनके योगदान को सम्मानित करने और अपने कर्तव्यों का पालन करने की प्रेरणा देता है। पवित्र मन से किए गए तर्पण और भोजन से न केवल पितरों की आत्मा को शांति मिलती है, अपितु यह हमारे परिवार में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का संचार भी करता है।
🙏🏼 आइए, इस पावन पितृ पक्ष पर अपनी श्रद्धा और प्रेम से पितरों को याद करें और धर्मपूर्वक तर्पण व भोजन अर्पित कर उनकी आत्मा की शांति सुनिश्चित करें।

