October 18, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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हरदीबाजार के भूविस्थापितों ने SECL प्रबंधन को दी कड़ी चेतावनी – बिना लिखित समझौते सर्वे और मकान ध्वस्त नहीं होंगे

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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/  कोरबा। दीपका कोल परियोजना के अंतर्गत अधिग्रहित ग्राम हरदीबाजार के ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार व SECL (साउथ ईस्ट कोलफील्ड्स लिमिटेड) प्रबंधन को साफ अल्टीमेटम जारी किया है। ग्राम पंचायत व प्रभावित ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से स्पष्ट किया है कि उनकी सातों प्रमुख मांगें पूरी किए बिना कोई सर्वेक्षण प्रक्रिया नहीं चलेगी और न ही किसी मकान या संपत्ति को तोड़ा जाएगा।
ग्रामीणों ने अपनी मांगों को बेहद संजीदगी से रखा है, जिसमें पुनर्वास स्थल पर सभी जरूरी सुविधाओं के साथ-साथ रोजगार और मुआवजे की गारंटी शामिल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह प्रक्रिया केवल ग्राम पंचायत व ग्रामसभा की सहमति से ही आगे बढ़ेगी, अन्यथा प्रशासन व SECL प्रबंधन पूरी जिम्मेदारी स्वयं लें।
प्रमुख मांगें विस्तार से:
सुविधाओं से युक्त पुनर्वास स्थल:
नाली, स्वच्छ जल, बिजली, अच्छी सड़क व्यवस्था, हाट-बाजार, खेल मैदान, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल एवं सभी जरूरी सरकारी विभागीय कार्यालय पुनर्वास स्थल पर उपलब्ध कराए जाएं।
नौकरी की गारंटी:
उच्च न्यायालय बिलासपुर के आदेशानुसार प्रभावित हर परिवार को SECL दीपका परियोजना में नौकरी प्रदान की जाए।
पूर्ण मुआवजा:
2004 व 2010 में नामांतरण व प्रमाणीकरण प्राप्त ज़मीन व मकान मालिकों को उनकी सम्पत्ति का 100% मुआवजा दिलाया जाए।
सर्वे के समय मुआवजा एवं पट्टा:
मकान व संपत्ति की नापी के साथ ही प्रभावित परिवारों को मुआवजा राशि व मालिकाना हक़ का पट्टा सौंपा जाए।
सरकारी आदेशानुसार मुआवजा भुगतान:
मकान तोड़ने से पूर्व एकमुश्त मुआवजा भुगतान अनिवार्य हो।
अनुसूचित क्षेत्र के अधिकार का सम्मान:
पेसा एक्ट के तहत अधिग्रहण एवं पुनर्वास की प्रक्रिया ग्राम पंचायत व ग्रामसभा की सहमति से ही की जाए।
रोज़गार की व्यवस्था:
मकान तोड़ने वाले दिन प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने के साथ स्थानीय बेरोजगारों को निजी कंपनियों में तत्काल नौकरी दिलाई जाए।
ग्रामीणों का कड़ा अल्टीमेटम:
ग्रामवासियों ने स्पष्ट रूप से प्रशासन और SECL प्रबंधन को आगाह किया है कि यदि उनकी ऊपर बताई गई मांगें नहीं मानी गईं और जबरन सर्वे प्रक्रिया शुरू की गई, तो पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों पर होगी। उन्होंने लिखा है कि बिना लिखित समझौते व स्पष्ट सुरक्षा गारंटी के कोई भी कार्यवाही नहीं चलेगी।
ग्रामीणों ने आग्रह किया कि यह मामला शीघ्र सुलझाया जाए ताकि भविष्य में संघर्ष की स्थिति उत्पन्न न हो। साथ ही उन्होंने सरकार व प्रशासन से जल्द संवाद स्थापित कर समस्या का समाधान करने की मांग की है।

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