एसईसीएल दीपका में वित्तीय गड़बड़ी और ठेका घोटाले का आरोप – करोड़ों का नुकसान, प्रबंधन की संदिग्ध चुप्पी जारी


त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदानों में गिनी जाने वाली एसईसीएल दीपका खदान इन दिनों गंभीर विवादों में घिरी हुई है। खदान प्रबंधन पर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने पारदर्शिता की धज्जियां उड़ाते हुए वित्तीय अनियमितता और ठेका घोटाले को अंजाम दिया, जिससे कंपनी को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, पिछले सात–आठ महीनों से दीपका प्रोजेक्ट में फाइनेंस डिपार्टमेंट कार्यरत नहीं है। इस कारण ठेकेदारों, सप्लायरों और कर्मचारियों को छोटी-सी फाइल व भुगतान के लिए भी एरिया ऑफिस का चक्कर लगाना पड़ रहा है। पीड़ितों का आरोप है कि इससे समय की बर्बादी के साथ-साथ अनावश्यक परेशानियाँ और अतिरिक्त व्यय हो रहा है।

सूत्र बताते हैं कि फाइनेंस डिपार्टमेंट को ‘सेंट्रलाइज्ड’ करने की प्रक्रिया लागू की गई है, जिससे कथित तौर पर कुछ अधिकारियों को व्यक्तिगत फायदा हो रहा है। जबकि कोरबा जिले की अन्य खदानों – गेवरा व कुसमुंडा – में फाइनेंस डिपार्टमेंट अभी भी प्रोजेक्ट स्तर पर कार्यरत है।
वहीं, ठेका कार्यों में मनमानी के आरोप भी गंभीर रूप से सामने आए हैं। पहले जहां 2 लाख रुपये तक के कार्य प्रोजेक्ट स्तर पर संपन्न किए जाते थे, अब सभी कार्यों की स्वीकृति एरिया स्तर से ली जा रही है। इससे पारदर्शिता खत्म होने के साथ ही मनमानी और कमीशनखोरी की आशंका भी गहराई है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि इस बदलाव से कंपनी को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।
कर्मचारी संघ व ठेकेदार संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई, तो कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हो सकते हैं। परंतु, जब इन आरोपों पर प्रबंधन से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इस संदिग्ध चुप्पी से प्रबंधन की नीयत पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अब सबकी निगाहें एसईसीएल के शीर्ष प्रबंधन पर हैं कि क्या वे इस वित्तीय अनियमितता व ठेका घोटाले पर पारदर्शी जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे, या फिर हमेशा की तरह फाइलों व दबाव के चलते चुप्पी साधेंगे

