शासकीय जमीन का माफिया खेल खुला : करोड़ों में बेची गई सरकारी भूमि पर प्रशासन मूकदर्शक बना, लूट के खिलाफ आवाज उठाने वालों को दबाने की साजिश जारी!


त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ कोरबा, छत्तीसगढ़ – मानिकपुर डिपरापारा में सरकारी खजाने की एक बड़ी लूट का सनसनीखेज मामला सामने आया है। लगभग 01 एकड़ शासकीय भूमि को लक्ष्मण लहरे, सीताराम चौहान, राजू सिमोन और सूरज चौहान ने मनमानी से 19 लोगों को प्लॉट काट-का्टकर करोड़ों रुपये में बेचा। यह पूरे इलाके में भ्रष्टाचार का काला अध्याय बन चुका है।
पार्षद सुनीता चौहान ने पिछले तीन महीनों से प्रशासन के तमाम दफ्तरों – तहसील, कलेक्टर कार्यालय, नगर निगम, पटवारी कार्यालय से लेकर कोरबा विधायक तक गुहार लगाई। लेकिन प्रशासन ने केवल नौ घरों पर आधी-अधूरी कार्रवाई की। शेष 10 घरों पर तो दो दिन की मोहलत देकर मामले को टाल दिया गया, जिससे प्रशासन पर गंभीर संदेह खड़ा हो गया है।

आंकड़ों की जबान बोले तो 10 जून को आवेदन देने के बाद भी अब तक न तो अतिक्रमण हटाया गया है, न जांच पूरी हुई है। उल्टा, नौ घरों से हर घर पर पचास-पचास हजार रुपये वसूली की खबरें उभर रही हैं। आरोप है कि यह वसूली उच्च अधिकारियों के नाम से की जा रही है। जनता पूछ रही है – क्या ये अधिकारी भी इन दलालों के साथ मिलकर शासकीय संपत्ति की लूट में शरीक हैं?
क्षेत्रवासियों का कहना है कि लक्ष्मण लहरे, सीताराम चौहान, राजू सिमोन, सूरज चौहान जैसे दलालों को खुलेआम राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसकी वजह से आज प्रशासन बेबस और सहम हुआ खड़ा दिख रहा है। अब सवाल यह उठता है कि क्या ये राजनीतिक संरक्षक ही उन भ्रष्ट अधिकारियों की चुप्पी का कारण हैं?

यह मामला केवल कोरबा का नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ राज्य के प्रशासनिक भ्रष्टाचार का प्रतिनिधित्व बन चुका है। लोग रोष प्रकट कर रहे हैं कि शासकीय संपत्ति के साथ ऐसा बेदर्दी का खेल चलने दिया गया तो आम जनता का विश्वास भी प्रशासन से उठ जाएगा।
अब जनता का एक ही सवाल – कब होगी इस ऐतिहासिक लूट पर सख्त कार्रवाई? कब होगा उन दलालों और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त तत्वों की बेनकाबी? प्रशासन का जवाब जनता का भरोसा फिर से जीत पाएगा या भ्रष्टाचार के इस खेल में खुद भी डूब जाएगा?

