भोजली तिहार पर रामनगर में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, शिव मंदिर से छठ घाट तक निकली भव्य शोभायात्रापार्षद धन कुमारी गर्ग, मंडल मंत्री शांति यादव सहित सैकड़ों श्रद्धालु रहे शामिल, पारंपरिक गीतों और भजनों से गूंजा माहौल



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा। रामनगर क्षेत्र में भोजली तिहार के अवसर पर रविवार शाम श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। पार्षद धन कुमारी गर्ग के नेतृत्व में शिव मंदिर से छठ घाट तक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें मंडल की कोरबा मंडल मंत्री शांति यादव, यशोदा साहू, विजय साहू, ललित सिंह, पिंकी चौहान, सुशील गर्ग सहित पूरा वार्ड परिवार उत्साहपूर्वक शामिल हुआ।

शोभायात्रा में महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजी-धजी, सिर पर भोजली की टोकरी लिए हुए चल रही थीं, जबकि पुरुष बाजे-गाजे, ढोल-ढमाकों और भजन-कीर्तन की धुन पर नाचते-गाते आगे बढ़ रहे थे। पूरे मार्ग में ‘जय भोजली माता’ और भक्ति गीतों की गूंज ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
छठ घाट पर पहुंचकर विधि-विधान से भोजली का विसर्जन किया गया और सभी ने मिलकर क्षेत्र की खुशहाली, वर्षा, और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। इस मौके पर वार्डवासियों ने एक-दूसरे को भोजली तिहार की शुभकामनाएं दीं और एकजुटता का संदेश दिया।
भोजली तिहार का महत्व और इतिहास
भोजली तिहार छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख लोकपर्व है, जो हरियाली, फसल और प्रकृति के प्रति आभार का प्रतीक है। इसे सावन महीने में बहनों द्वारा खेतों में बोए गए भोजली के पौधों की पूजा कर मनाया जाता है। मान्यता है कि यह परंपरा सदियों पुरानी है और इसका उद्देश्य कृषि सम्पन्नता, वर्षा और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करना है।
भोजली विसर्जन के दौरान पारंपरिक लोकगीत गाए जाते हैं, जिनमें बहनों के स्नेह, प्रकृति के सौंदर्य और समृद्धि की झलक मिलती है। गीतों में अक्सर खेत-खलिहान, नदियों, और हरियाली का भावपूर्ण वर्णन होता है, जो छत्तीसगढ़ी संस्कृति की गहरी जड़ों को दर्शाता है।
रामनगर में इस वर्ष का आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि सामाजिक सद्भाव, लोकसंस्कृति के संरक्षण और भाईचारे का प्रेरणादायक उदाहरण भी बना।


