March 13, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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सच्चा मित्र वही, जो दुःख-सुख में साथ निभाए – मित्रता दिवस पर विशेष संदेश

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा।मित्रता दिवस के अवसर पर जीवन में मित्र के महत्व को रेखांकित करते हुए मैथिलीशरण गुप्त जी की पंक्तियों के माध्यम से सच्चे मित्र की परिभाषा को हृदयस्पर्शी ढंग से प्रस्तुत किया गया।

“तप्त हृदय को, सरस स्नेह से, जो सहला दे, मित्र वही है।
रूखे मन को, सराबोर कर, जो नहला दे, मित्र वही है।
प्रिय वियोग, संतप्त चित्त को, जो बहला दे, मित्र वही है।”

इन पंक्तियों के साथ मित्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित की गईं।

संदेश में कहा गया कि जीवन एक युद्धभूमि की तरह है। जीवनरूपी नैया में समय-समय पर परेशानियों और विपत्तियों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं कठिन समय में हमें अपनों की पहचान होती है। दुख-संकट में ही सच्चे मित्र की सत्यता सामने आती है। किसी ने सही कहा है कि सच्चा प्यार तो फिर भी मिल सकता है, लेकिन सच्चा मित्र मिलना बहुत कठिन है।

इस अवसर पर गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के माध्यम से अच्छे और बुरे मित्र के लक्षण भी बताए गए –

  1. दुःख-सुख में समान भाव:
    “जे न मित्र दुख होहिं दुखारी। तिन्हहि बिलोकत पातक भारी॥
    निज दुख गिरि सम रज करि जाना। मित्रक दुख रज मेरु समाना॥”
    भावार्थ: जो मित्र के दुख से दुखी नहीं होते, वे पाप के भागी होते हैं। अपने भारी दुख को धूल और मित्र के छोटे दुख को पर्वत के समान मानना ही सच्ची मित्रता है।
  2. सही मार्गदर्शन:
    “कुपथ निवारि सुपंथ चलावा। गुन प्रगटै अवगुनन्हि दुरावा॥”
    भावार्थ: सच्चा मित्र बुरे मार्ग से रोककर अच्छे मार्ग पर चलाता है। मित्र के गुण प्रकट करता है और अवगुण छिपाता है।
  3. निःस्वार्थ सहयोग:
    “देत लेत मन संक न धरई। बल अनुमान सदा हित करई॥
    बिपति काल कर सतगुन नेहा। श्रुति कह संत मित्र गुन एहा॥”
    भावार्थ: देने-लेने में शंका न करना, अपनी क्षमता अनुसार मित्र का भला करना और विपत्ति में सौगुना प्रेम दिखाना – यही श्रेष्ठ मित्र के लक्षण हैं।
  4. कुमित्र से सावधान:
    “आगें कह मृदु बचन बनाई। पाछें अनहित मन कुटिलाई॥
    जाकर चित अहि गति सम भाई। अस कुमित्र परिहरेहिं भलाई॥”
    भावार्थ: जो सामने मीठी बातें करे और पीछे बुराई करे, उसका मन साँप के समान टेढ़ा होता है। ऐसे कुमित्र को त्यागना ही अच्छा है।

संदेश में यह भी कहा गया कि सच्चा मित्र वही है जो बिना किसी स्वार्थ के हर सुख-दुःख में आपके साथ खड़ा रहे। विपत्ति में जो मित्र अपना हाथ बढ़ाता है वही जीवन का सच्चा साथी होता है।

मित्रता दिवस के इस अवसर पर यही संदेश दिया गया कि हम सच्चे मित्र के गुणों को अपनाएँ और कुमित्रता से दूर रहें।

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