August 17, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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त्रिशताब्दी वर्ष में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर को चित्रों के माध्यम से दी गई अनुपम श्रद्धांजलि — संस्कार भारती और दक्षिण-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र नागपुर की अद्वितीय प्रदर्शनी ने दर्शकों का मन मोहा

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कोरबा, जून 2025।
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/  पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की त्रिशताब्दी जयंती वर्ष के अंतर्गत पूरे देशभर में उनके जीवन, दर्शन और कर्तृत्व को जनमानस तक पहुँचाने के उद्देश्य से विविध सांस्कृतिक आयोजनों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है। इस कड़ी में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अधीनस्थ दक्षिण-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर एवं संस्कार भारती छत्तीसगढ़ के संयुक्त प्रयास से एक अत्यंत विशिष्ट चित्रकला प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया, जिसने इतिहास, कला और संस्कृति के अनुरागियों को गहराई से प्रभावित किया।

प्रदर्शनी में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के जीवन के विविध पहलुओं को दर्शाते 51 कलात्मक चित्रों के माध्यम से एक सजीव और प्रेरणादायक यात्रा प्रस्तुत की गई। इस ऐतिहासिक कला-प्रयास को संस्कार भारती छत्तीसगढ़ के प्रस्ताव पर दक्षिण-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर की निदेशक श्रीमती आस्था कारलेकर द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई।

इस चित्र प्रदर्शनी को रायपुर, कोरबा, भिलाई, राजनांदगांव, जशपुर, रामानुजगंज, बिलासपुर, रायगढ़ सहित अनेक स्थानों पर प्रदर्शित किया गया, जिसे हजारों लोगों ने देखा और सराहा।

प्रदर्शनी का शुभारंभ और समापन समारोह:
इस कलात्मक यात्रा की भव्य शुरुआत संस्कार महोत्सव रायपुर में हुई, जहां प्रदेश के प्रतिष्ठित कलाकार पद्मश्री अनुज शर्मा (विधायक) द्वारा विधिवत उद्घाटन किया गया। समापन समारोह में सुप्रसिद्ध सिने कलाकार पद्मश्री मनोज जोशी (मुंबई) ने प्रदर्शनी की सराहना करते हुए इसे एक “दुर्लभ और प्रेरणादायक प्रस्तुति” बताया। रायगढ़ एवं बिलासपुर में भी यह प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी। बिलासपुर में कल्याण आश्रमों में निवासरत लगभग 200 आदिवासी छात्र-छात्राओं ने इसका अवलोकन किया और लोकमाता अहिल्याबाई के चरित्र से प्रेरणा प्राप्त की।

विशेष प्रस्तुतियाँ एवं जन सहभागिता:
प्रदर्शनी के दौरान राष्ट्र सेविका समिति की सुश्री सुलभा ताई देशपांडे ने कहा, “महापुरुषों की जीवनी जब चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत की जाती है तो उसका प्रभाव स्थायी होता है। पुस्तक की स्मृति क्षणिक होती है, परंतु चित्र हृदय में स्थायी स्थान बना लेते हैं।”

कोरबा में सात दिवसीय प्रदर्शनी रही आकर्षण का केंद्र:
कोरबा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रादेशिक संघ शिक्षा वर्ग के अंतर्गत आयोजित सात दिवसीय इस प्रदर्शनी का अवलोकन 700 से अधिक युवाओं ने किया। कोरबा के सैकड़ों प्रबुद्ध नागरिकों, व्यवसायियों ने भी इसमें भाग लिया। विशेष रूप से छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री श्री लखन देवांगन ने भी प्रदर्शनी का अवलोकन कर इसे “युगों-युगों तक स्मरणीय प्रस्तुति” बताया।

लोकमाता के नाम पर कोरबा में कन्वेंशन सेंटर:
कोरबा में ही एक नई ऐतिहासिक पहल के तहत एक कन्वेंशन सेंटर का नाम “पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर कन्वेंशन सेंटर” रखा गया। इस नामकरण समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय स्वयं उपस्थित रहे और उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए कहा,

> “लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के जीवन पर इतनी बड़ी और जीवंत चित्र प्रदर्शनी मैंने अपने जीवन में पहली बार देखी है। यह प्रयास प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।”

चित्रों के निर्माण में कलाकारों की समर्पित भूमिका:
इस भव्य प्रदर्शनी को साकार रूप देने में प्रदेश के विभिन्न जिलों के कलाकारों, चित्रकारों और कला साधकों ने विशेष योगदान दिया। इनमें प्रमुख नाम हैं:

निर्मलकर (महासमुंद), कल्याणी बाटवे (बिलासपुर), खुशी चौधरी (रायपुर), राजेंद्र राव राऊत व अंकिता राऊत (कोंडागांव), शीतल शर्मा, ऋचा तेजस, दीपक शर्मा, मनीष शर्मा, डॉ. शशि प्रिया उपाध्याय, अरविंद यादव, राहुल दत्त (रायपुर)

संदीप कुमार सारथी (कटघोरा), हरि सिंह क्षत्री व शिवेंद्र सिंह (कोरबा), चंद्रशेखर देवांगन, रूपाली काले, मोना केवट, वंशिका मिश्रा, दिव्या चंद्रा (बिलासपुर)

रविंद्र कश्यप (जांजगीर-चांपा), मनोज श्रीवास्तव, धृति राठौर, स्नेहा यादव, स्वाती देवांग पंड्या, सुरेंद्र कुमार मेहर (रायगढ़)

पुष्तम तांडी, नेहाल वैष्णव, निकिता साहू (रायपुर), अमृता गौरव श्रीवास्तव (महासमुंद), गौरव सिंह व राकेश यादव (राजनांदगांव), अवध राम कंवर व दिव्य प्रकाश साहू (कुरुद)

साथ ही अनेक महिला कलाकारों – चित्रा देवांगन, रोशनी साहू, सोनम शर्मा, आंचल यादव, कामिनी साहू, गायत्री, सीमा, सुकनिया आदि ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह चित्र प्रदर्शनी सिर्फ एक कला आयोजन नहीं था, बल्कि यह लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के जीवन, मूल्यों और आदर्शों को जनमानस तक पहुँचाने का सांस्कृतिक संकल्प था। इस प्रयास ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा दी और समाज के हर वर्ग को प्रेरित किया।

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