August 17, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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फर्जी यूनियन के नाम पर करोड़ों की ठगी: छत्तीसगढ़ वन विभाग में RTI से हुआ बड़ा खुलासा

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 त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ रायपुर छत्तीसगढ़ वन विभाग में एक चौंकाने वाला घोटाला उजागर हुआ है, जिसमें “फर्जी यूनियन” के नाम पर हजारों दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों से अवैध वसूली की गई। इस पूरे मामले का पर्दाफाश एक RTI आवेदन के ज़रिए हुआ, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि “छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ” (पंजीयन क्रमांक 548) नाम की यूनियन कभी विधिवत रूप से पंजीकृत ही नहीं हुई थी। इसके बावजूद यह संगठन लंबे समय तक शासन और कर्मचारियों दोनों को गुमराह करता रहा।

 

 

फर्जीवाड़े का तंत्र:
यह कथित यूनियन वर्षों से शासन को पत्र भेजती रही, न्यायालयों में याचिकाएं दाखिल करती रही और कर्मचारियों को आंदोलनों के लिए प्रेरित करती रही। सबसे हैरानी की बात यह है कि यह सब बिना किसी वैध दस्तावेज, लेखा-जोखा या लेखा परीक्षित रिपोर्ट के किया गया। कर्मचारियों से ₹300 से ₹500 तक की राशि कभी सदस्यता शुल्क, तो कभी आंदोलन के नाम पर वसूली जाती रही।

मुख्य आरोपी – रामकुमार सिन्हा:
खुद को “प्रांताध्यक्ष” बताने वाला रामकुमार सिन्हा इस पूरे रैकेट का सरगना बताया जा रहा है। उसने फर्जी पंजीयन के सहारे वर्षों तक लाखों रुपये की वसूली की, जिसका कोई भी आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं मिला है।

RTI से हुआ खुलासा:
इस घोटाले का भंडाफोड़ करने वाली महिला कर्मचारी बिंदेश्वरी वैष्णव ने आरोप लगाया है कि यह संगठन पूरी तरह अवैध था और कर्मचारियों के साथ संगठित रूप से धोखाधड़ी की गई। उन्होंने यह भी कहा कि शासन-प्रशासन की लापरवाही या संभावित मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा इतने वर्षों तक चलता रहा।

अब खड़े होते हैं गंभीर सवाल:

  • क्या रामकुमार सिन्हा और उसके सहयोगियों पर आपराधिक मामला दर्ज होगा?
  • क्या आर्थिक अपराध शाखा (EOW) इस अवैध वसूली की जांच करेगी?
  • क्या शासन अब फर्जी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करेगा?
  • और सबसे अहम – क्या ईमानदार कर्मचारियों को उनका हक और न्याय मिलेगा?

यह घोटाला सिर्फ एक विभाग तक सीमित नहीं है – अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह मॉडल अन्य सरकारी विभागों के लिए भी ठगी का रास्ता बन सकता है। अब वक्त है कि दोषियों को कानून के शिकंजे में लाया जाए और सिस्टम को साफ किया जाए।

 

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