रायगढ़ RTO में बिना ट्रायल के बन रहे ड्राइविंग लाइसेंस! 3500-4000 में ‘चाबी’ मौत की? ट्रायल से नहीं, एजेंट सेटिंग से बन रहे लाइसेंस, प्रशासन मौन




त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ रायगढ़, अप्रैल 2025 — “पैसे दो, लाइसेंस लो – ड्राइविंग आती है या नहीं, किसे फर्क पड़ता है?” — ये जुमला अब रायगढ़ RTO की हकीकत बन चुका है। जहां ड्राइविंग लाइसेंस अब कानूनी प्रक्रिया और ट्रायल से नहीं, बल्कि एजेंटों के जुगाड़ और “फीस से ज्यादा रिश्वत” के दम पर बन रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो रायगढ़ क्षेत्र में कुछ एजेंटों द्वारा मात्र 3500 से 4000 रुपये में लाइसेंस बनवाए जा रहे हैं, वो भी बिना किसी ट्रायल, टेस्ट या वैध प्रक्रिया के। जबकि सरकारी फीस महज 1000-1500 रुपये के आसपास होती है।
कैसे चल रहा ये फर्जीवाड़ा?
- एजेंटों और RTO के बीच अंदरूनी सेटिंग के चलते बिना ट्रायल ड्राइविंग लाइसेंस तैयार हो रहे हैं।
- आम आदमी को महीनों लाइन में लगना पड़ता है, जबकि एजेंटों के क्लाइंट को सिर्फ फॉर्म, फोटो और पैसा देना होता है।
- ‘लर्निंग से डायरेक्ट परमानेंट लाइसेंस’ – वो भी बिना वाहन छुए!
सड़क सुरक्षा को सीधी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि बिना टेस्ट और ट्रेनिंग के बनाए गए ये लाइसेंसधारी सड़कों पर चलती मौत बन चुके हैं।
रायगढ़ में सड़क हादसों की बढ़ती संख्या का एक बड़ा कारण ये फर्जी लाइसेंसधारी भी हैं, जो न ट्रैफिक नियम जानते हैं, न सुरक्षा के मायने।
प्रश. चुप्पी – बड़ा सवाल
- क्या जिला प्रशासन और परिवहन विभाग इस खुली लापरवाही पर अब भी आंख मूंदे रखेगा?
- क्या ऐसे फर्जी तरीके से जारी लाइसेंसों की जांच होगी?
- क्या एजेंटों और संबंधित RTO कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी?
जनता की मांग
- फर्जी लाइसेंसों की तत्काल पहचान और निरस्तीकरण
- एजेंट-ऑफिस गठजोड़ की जांच हेतु विशेष समिति का गठन
- ट्रायल प्रक्रिया को पारदर्शी और डिजिटल किया जाए
- आम जनता के लिए सीधा, सरल, भ्रष्टाचार मुक्त लाइसेंस सिस्टम
निष्कर्ष
अगर यह सिलसिला नहीं रुका, तो रायगढ़ की सड़कें और भी ज्यादा असुरक्षित हो सकती हैं। अब सवाल सिर्फ कानून के पालन का नहीं, हर नागरिक की जान की सुरक्षा का है।


