February 13, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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 त्रिनेत्र टइम्स  कोरबा जिले के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत वाहनों के किराये की निविदा में व्यापक भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। निविदा प्रक्रिया में घोर अनियमितताओं का आरोप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय और जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (डीपीएम) पर लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने इस मामले में सीएमएचओ कार्यालय के साथ-साथ एनएचएम के वाहन शाखा प्रभारी मंजू भगत को भी मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया है।

निविदा में अशरफ अंसारी और मंजू भगत की भूमिका

शिकायत के अनुसार, एनएचएम के डीपीएम अशरफ अंसारी और जिला लेखा प्रबंधक (डिस्ट्रिक्ट अकाउंट मैनेजर) मंजू भगत, जो एनएचएम के वाहन शाखा की प्रभारी हैं, इस भ्रष्टाचार में मुख्य रूप से लिप्त पाए गए हैं। मंजू भगत को इस निविदा प्रक्रिया के संचालन और संबंधित बिलों के पास करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन उन्होंने नियमों को दरकिनार कर निविदा प्रक्रिया में अनियमितताओं की अनुमति दी।

मंजू भगत पर आरोप है कि उन्होंने निविदा में तकनीकी और वित्तीय अनियमितताओं के बावजूद सर कॉर्पोरेशन और अन्य फर्मों को लाभ पहुँचाने के लिए जानबूझकर नियमों की अनदेखी की। साथ ही, मंजू भगत ही वह अधिकारी हैं जिन्होंने सर कॉर्पोरेशन और अन्य फर्मों के बिलों को बिना किसी अनुबंध और कार्य आदेश के पास किया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।

वित्तीय अनियमितताओं के बावजूद बिलों का पास होना

शिकायतकर्ता का कहना है कि निविदा प्रक्रिया के बाद, सर कॉर्पोरेशन और अन्य फर्मों को अनुचित तरीके से काम सौंपा गया, लेकिन बिना किसी वैध अनुबंध और कार्य आदेश के भी उन्हें मासिक भुगतान किया गया। इन सभी भुगतान के लिए मंजू भगत ने बिलों को मंजूरी दी। यह अनियमितता स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि वित्तीय प्रक्रिया में घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार किया गया है।

अशरफ अंसारी और मंजू भगत के बीच मिलीभगत

यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि अशरफ अंसारी और मंजू भगत के बीच मिलीभगत के कारण निविदा प्रक्रिया में इतनी बड़ी अनियमितताएँ हो सकीं। जहां अशरफ अंसारी ने निविदा प्रक्रिया को नियमों के खिलाफ संचालित किया, वहीं मंजू भगत ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बिलों को पास किया और गलत तरीके से फर्मों को भुगतान सुनिश्चित किया।

शिकायतकर्ता ने कहा है कि यह सारा खेल अशरफ अंसारी और मंजू भगत की मिलीभगत से हुआ, जिसमें दोनों ने निजी लाभ के लिए सरकारी नियमों की अनदेखी की और सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचाया।

मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग

शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अशरफ अंसारी और मंजू भगत द्वारा किए गए इस भ्रष्टाचार के लिए दोनों को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यदि जांच में वे दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें उनके पदों से बर्खास्त किया जाए और उनके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया जाए।

शिकायतकर्ता ने यह भी कहा है कि निविदा प्रक्रिया की प्रथमदृष्टया अनियमितताएँ स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि इसे तत्काल निरस्त कर नई निविदा जारी की जाए। साथ ही, वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए सही और पारदर्शी तरीके से निविदा प्रक्रिया पूरी की जाए।

कोरबा जिले के एनएचएम में इस भ्रष्टाचार के मामले ने सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता की मांग है कि अशरफ अंसारी और मंजू भगत पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके और सरकारी धन का सही उपयोग हो सके। अब देखना होगा कि इस मामले में कलेक्टर और अन्य संबंधित अधिकारी क्या कदम उठाते हैं।

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