कोरबा अग्नि सुरक्षा से संबंधित एक महत्वपूर्ण बैठक हुई संपन्न



त्रिनेत्र टाईम्स कोरबा जिला पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के द्वारा आग लगने की बढ़ रही घटनाओं को देखते हुए उनके निर्देश पर विशेष अग्रि सुरक्षा अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में सभी थाना/चौकी के द्वारा अग्निशमन विभाग के साथ मॉक ड्रित का आयोजन किया गया है।
इसी तारतम्य में पाली थाना में आग लगने पर बरतने वाली सावधानी, बचाव के तरीके, क्या करना, क्या नहीं करना आदि के बारे में जानकारी देने पाली थाना में स्थित बड़े शो रूम संचालक, सीएसपीडीसीएल के जूनियर इंजीनियर, एसईसीएल के फायर फाइटर अधिकारी तथा नगर पंचायत अध्यक्ष की एक बैठक ली गयी।
जिसमे पाली थाना प्रभारी चमन सिन्हा के नेतृत्व में वर्तमान समय में भीषण गर्मी को देखते हुए एसी फटने या अन्य कारणों से आग लगने पर राहत एवं बचाव पर चर्चा एवं सुझाव दिया गया, साथ ही व्यापारियों को अपने दुकान में अग्नि शामक यंत्र रखने एवं निकासी मार्ग को हमेशा रखने कहा, दुकानों में एसी को सुरक्षित रूप से रखकर चलाने बताया गया, और विभिन्न प्रकार के अग्नि शामक यंत्र के बारे में जानकारी दी गयी।
सीएसपीडीसीएल बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर ने कुछ व्यापारियों को अलग से ट्रांसफार्मर लगाने सलाह दी, साथ ही घरों में शार्ट सर्किट न हो इसके बारे में भी एहतियात बरतने संबंधी जानकारी दी गई। सभी व्यापारियों को फायर ब्रिगेड का नंबर दिया गया जिससे आपातकाल में वे तुरंत कॉल कर सके।साथ ही पाली पुलिस द्वारा घर, रसोई, दुकान, कार्यालय, पैरावट, गैस सिलेंडर या बाहर कहीं भी आग लगने की स्थिति होने पर काबू पाने के लिये क्या करना है और क्या नहीं करना चाहिए के बारे में बताया गया। दुकानदारों और आम जनता के द्वारा पाली पुलिस और अग्निशमन विभाग को जागरूक करने के लिए साधुवाद ज्ञापित किया गया।
01 जून / मित्तल
[6/1, 8:09 PM] pawansinha400: (कोरबा) पचरा पौडी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जर्जर स्थिति में
कोरबा (ईएमएस) कोरबा जिले में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या और संसाधन में बढ़ोतरी का काम लगातार चल रहा है, इस प्रकार की कार्य पद्धति से अधिकतम लोगों को चिकित्सा लाभ देना संभव हुआ है, लेकिन कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। पोंडी-उपरोड़ा विकास खंड अंतर्गत पचरा पौडी उपस्वास्थ्य केंद्र का हाल बेहाल है। जर्जर स्थिति में भवन के होने से एक तो कम मरीज यहां पहुंचते हैं और जो आते हैं, उन्हें इस बात का भय बना रहता हैं कि पता नहीं कब क्या हो जाए।
जानकारी के अनुसार अस्पताल भवन का छज्जा गिर रहा है। साथ ही दीवार पूरी तरह छतिग्रस्त हो गई है। हर कोने में इस प्रकार के नजारे सामने आ रहे हैं जिनमे दरारों को साफ देखा जा सकता है। यही कारण है कि इस अस्पताल में उपचार करने के लिए आने से पहले मरीज को काफी सोच विचार करना पड़ता है कि वह जाएं या नहीं। आपात स्थिति में यहां संस्थागत प्रसव से संबंधित मामलों को निपटाया जा रहा है। इस दौरान गर्भवती स्त्री के साथ-साथ परिजनों को अंदेशा बना होता है कि पता नहीं कब क्या हो जाए। अस्पताल की जर्जर स्थिति को देखते हुए काफी समय से इसके सुधार के लिए मांग की जाती रही है लेकिन अब तक इस तरफ गंभीरता नहीं दिखाई गयी हैं। इस केंद्र के कर्मचारियों के साथ-साथ मरीज डर के साये में ड्यूटी करने और उपचार करने मजबूर हैं।

