*।।ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।।*



*।।ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।।*
*ज्येष्ठ मास कृष्ण पक्ष की अपरा एकादशी तिथि 2 जून 2024 रविवार को सुबह 05:40 से शुरू होगी और 3 जून 2024 सोमवार मध्य रात्रि 02:21 पर समाप्त हो जाएगी।*
*द्वादशी तिथि प्रारंभ होगी 3 जून 2024 सोमवार को मध्य रात्रि सुबह 2:42 पर और इसी के साथ हरिवासर का समय भी प्रारंभ हो जायेगा , शुरुआत के 5 से 6 घंटे का समय हरिवासर रहता है। और द्वादशी तिथि समाप्त होने का समय 4 जून मंगलवार को यानी की 3 जून सोमवार की ही मध्य रात्रि 12:18 पर। हरिवासर का जो समय है वह 3 जून 2024 सोमवार को सुबह 8:30 पर समाप्त होगा।*
*ऐसे मे आप चाहें तो दिनाँक 2 जून 2024 रविवार को व्रत रख सकते हैं। पर द्वादशी तिथि की एकादशी का ही व्रत रखना चाहिये। तिथि में हो रहा है।अतः पद्मपुराण के अनुसार अपरा एकादशी (द्वादशी युक्त) का व्रत दिनाँक 3 जून 2024 सोमवार को रखा जाना चाहिए।*
*एकादशी व्रत का पारण 04 जून सुबह 05:23 से सुबह 08:10 के बीच किया जाएगा।*
*।।अपरा एकादशी व्रत कथा।।*
*भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को अपरा एकादशी की कथा सुनाई, जिसे व्रत के दिन साधक को सुनना चाहिए।*
*इसके अनुसार प्राचीन काल में महीध्वज नाम का एक धर्मात्मा राजा राज्य करता था. उसका छोटा भाई वज्रध्वज क्रूर, अधर्मी और अन्यायी था। वह बड़े भाई से द्वेष रखता था। एक दिन उसने बड़े भाई की हत्या कर दी और उसकी देह एक जंगल में पीपल के पेड़ के नीचे गाड़ दिया। अकाल मृत्यु के कारण राजा प्रेत बन गया और उसी पीपल के पेड़ पर रहकर उत्पात करने लगा।*
*एक दिन धौम्य ऋषि उधर से गुजरे, उन्होंने पेड़ पर प्रेत देखा और तप के बल से उसकी कहानी जान ली और उसके उत्पात का कारण समझ लिया। इसके बाद ऋषि ने उसे पीपल के पेड़ से उतारा और परलोक विद्या का उपदेश दिया। इसके अलावा ऋषि ने स्वयं ही राजा की प्रेत योनि से मुक्ति के लिए अपरा (अचला) एकादशी का व्रत किया और उसे अगति से छुड़ाने के लिए व्रत के पुण्य फल को प्रेत बने राजा को अर्पित कर दिया।इस पुण्य के प्रभाव से राजा प्रेत योनि से मुक्त हो गया और ऋषि को धन्यवाद देता हुआ दिव्य देह धारण कर पुष्पक विमान से स्वर्ग चला गया। भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा कि हे राजन! यह कथा मैंने लोकहित के लिए कही है, इसे पढ़ने और सुनने से मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है।*

